कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से राज्य सरकार के उस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है, जिसमें राज्य सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन को इसके पहले दो अंतरों तक सीमित करने का निर्णय लिया गया था. राज्यपाल ने 21 सितंबर को लिखे पत्र में राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण और उसके गायन को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों का हवाला दिया है. उन्होंने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 का भी उल्लेख किया है.
राज्यपाल ने कहा कि 8 सितंबर को जारी राज्य सरकार का आदेश संविधान के तहत केंद्र और राज्य की कार्यकारी शक्तियों से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है. उन्होंने सरकार को सलाह दी कि किसी संभावित टकराव और कानूनी विवाद से बचने के लिए राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर केंद्र सरकार के मौजूदा निर्देशों का पालन किया जाए.
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से इस फैसले पर दोबारा विचार करने और यह जांचने की सलाह दी कि वंदे मातरम् को दो अंतरों तक सीमित करने का फैसला Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026, गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण और उसके गायन को लेकर जारी आदेशों और निर्देशों के अनुरूप है या नहीं.
इस चीज का किया जिक्र
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 162, 256 और 257(1) का भी उल्लेख किया. इसके अलावा उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच विधायी और कार्यकारी शक्तियों के संवैधानिक बंटवारे तथा राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन में एकरूपता और गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता का जिक्र किया. राज्यपाल ने अपने पत्र में कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि कानूनी स्थिति को संबंधित वैधानिक व्यवस्था और संविधान में दी गई स्वतंत्रताओं को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में राज्य सरकार को 8 सितंबर 2026 के सरकारी आदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए और राज्य सरकार के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर केंद्र सरकार के मौजूदा निर्देशों का पालन करना चाहिए.
टकराव से बचने की कोशिश
राज्यपाल ने कहा कि ऐसा करने से राज्य सरकार के प्रशासनिक निर्देशों और केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित प्रोटोकॉल के बीच अनावश्यक टकराव से बचा जा सकेगा. साथ ही, केंद्र और राज्य की कार्यकारी शक्तियों को लेकर संभावित संवैधानिक मुकदमेबाजी की स्थिति भी टाली जा सकती है. पत्र के अंत में राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर संवैधानिक मर्यादा, राष्ट्रीय प्रोटोकॉल में एकरूपता और भारत के राष्ट्रीय गीत के प्रति उचित सम्मान बनाए रखने के हित में सावधानीपूर्वक विचार किया जाएगा.
नागार्जुन