सिंगापुर में सोना क्यों रखते हैं दुनिया के रसूखदार? ये है वजह

दुनिया के बेहद अमीर लोग अपना सोना सिंगापुर में रखने लगे हैं. हाल के सालों में तेजी से ट्रेंड बढ़ा है. आखिर सिंगापुर को ही सोना सुरक्षित रखने के लिए मुफीद क्यों माना जा रहा है. वहां ऐसा क्या है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों से भी सोना वहीं जा रहा है.

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सिंगापुर में दुनिया भर से आ रहा सोना (Photo - Pixabay) सिंगापुर में दुनिया भर से आ रहा सोना (Photo - Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं.  ऐसे माहौल में दुनिया के अमीर लोग सिर्फ सोना खरीदने पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि उसे सुरक्षित रखने की जगह भी बदल रहे हैं. यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के कई बेहद अमीर लोग अपना सोना विदेशों में सुरक्षित रखने के लिए सिंगापुर का रुख कर रहे हैं.

सिंगापुर में एयरपोर्ट से के नजदीक एक बेहद सुरक्षित इमारत है. इसे 'द रिजर्व'  कहा जाता है. बाहर से देखने पर यह किसी आलीशान इमारत जैसी लगती है, लेकिन इसके अंदर अरबों डॉलर की दौलत सुरक्षित रखी जाती है. इस विशाल वॉल्ट में करीब 500 टन सोना रखने की क्षमता है, जिसकी कीमत करीब 64 अरब डॉलर बताई जाती है. आखिर दुनिया के रसूखदार लोग अपना सोना सिंगापुर में ही क्यों रख रहे हैं? इसके पीछे कई बड़ी वजहें हैं.

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एयरपोर्ट के पास बना है बेहद सुरक्षित वॉल्ट
सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट से कुछ दूरी पर छह मंजिला एक इमारत है. इसकी बाहरी सजावट में ओनिक्स पत्थर का इस्तेमाल किया गया है और अंदर जाने के लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है. इसी इमारत में द रिजर्व नाम की गोल्ड स्टोरेज फैसिलिटी है. इसके अंदर निजी वॉल्ट के अलावा एक विशाल स्टोरेज चैंबर भी है. यहां हजारों सेफ डिपॉजिट बॉक्स लगाए गए हैं, जो करीब तीन मंजिल की ऊंचाई तक पहुंचते हैं.

इस सुविधा में रखे सोने और चांदी की कीमत करीब 1.5 अरब डॉलर बताई गई है. लेकिन यह तो सिर्फ वहां रखा हुआ खजाना है. पूरी सुविधा की क्षमता इससे कहीं ज्यादा है.

500 टन सोना रखा जा सकता है
द रिजर्व में करीब 500 टन सोना रखने की क्षमता बताई गई है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी वैल्यू करीब 64 अरब डॉलर हो सकती है. यानी यह सिर्फ कुछ अमीर लोगों के लॉकर रखने की जगह नहीं है. यहां बहुत बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. सोने को सुरक्षित रखने की यह जरूरत ऐसे समय में और बढ़ रही है, जब दुनिया की अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक माहौल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

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अमीर लोग सोना विदेश में क्यों ले जा रहे हैं?
दुनिया के बेहद अमीर लोगों के पास अक्सर उनकी संपत्ति का एक हिस्सा सोने जैसे भौतिक एसेट में भी होता है. जब बाजार में आर्थिक या राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो कुछ निवेशक अपनी संपत्ति को अलग-अलग देशों में रखने की रणनीति अपनाते हैं.

इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए, अगर आपकी सारी संपत्ति एक ही जगह रखी है और उस जगह पर कोई आर्थिक या राजनीतिक समस्या आती है, तो जोखिम बढ़ जाता है. इसलिए बड़ी संपत्ति वाले लोग कई बार अपने एसेट को अलग-अलग जगहों पर रखने की कोशिश करते हैं. इसी वजह से ऑफशोर गोल्ड स्टोरेज यानी अपने देश से बाहर सोना रखने का चलन बढ़ रहा है. सिंगापुर इस मामले में एक पसंदीदा जगह बन रहा है.

सिंगापुर को क्यों माना जाता है सुरक्षित?
सिंगापुर की सबसे बड़ी ताकत उसकी राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता मानी जाती है. गोल्ड स्टोरेज इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ सिंगापुर को 'पूर्व का जिनेवा' तक कहते हैं. इसकी वजह यह है कि देश को एक सुरक्षित और स्थिर वित्तीय केंद्र के रूप में देखा जाता है.

अमीर लोगों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है. वे अपना सोना ऐसी जगह रखना चाहते हैं जहां उन्हें राजनीतिक अस्थिरता या अचानक बड़े बदलावों को लेकर अपेक्षाकृत कम चिंता हो. यही वजह है कि सिंगापुर सिर्फ सोना रखने की जगह नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी संपत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र भी बन चुका है.

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एयरपोर्ट पास होना भी बड़ी वजह
सिंगापुर के पक्ष में एक और बड़ा फायदा है, इसकी लोकेशन और कनेक्टिविटी. सिंगापुर एशिया के प्रमुख ट्रांजिट हब में से एक है. दुनिया के कई हिस्सों से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. यानी अगर किसी व्यक्ति ने अपना सोना सिंगापुर में रखा है और किसी वजह से उसे वापस लेना या दूसरी जगह भेजना है, तो अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी उसके काम आती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी गोल्ड वॉल्ट का ऐसे ट्रांजिट हब में होना काफी फायदेमंद होता है. यहां बैंकिंग सुविधाएं मिलती हैं, सोना स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से हासिल या ट्रांसफर भी किया जा सकता है.

स्विट्जरलैंड को मिल रही चुनौती?
सोना रखने के लिए लंबे समय से स्विट्जरलैंड को दुनिया की प्रमुख जगहों में गिना जाता रहा है. लेकिन अब सिंगापुर उसके सामने एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभर रहा है. इसकी वजह सिर्फ सुरक्षा नहीं है. सिंगापुर की भौगोलिक स्थिति, मजबूत वित्तीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी इसे बेहद अमीर लोगों के लिए आकर्षक बनाती है.

यानी जिस तरह स्विट्जरलैंड लंबे समय से दुनिया की संपत्ति के लिए सुरक्षित ठिकाने के तौर पर जाना जाता रहा है, उसी तरह सिंगापुर अब एशिया में ऐसी ही भूमिका मजबूत कर रहा है.

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आखिर सोना ही क्यों?
सोने को सदियों से संपत्ति सुरक्षित रखने के साधन के तौर पर देखा जाता है. यह किसी एक कंपनी या सरकार की देनदारी नहीं होता और दुनियाभर में इसकी कीमत को मान्यता मिलती है. आर्थिक संकट, महंगाई या भू-राजनीतिक तनाव के दौर में कई निवेशक सोने को अपने पोर्टफोलियो में रखना पसंद करते हैं. लेकिन जब सोना बड़ी मात्रा में हो, तो उसे घर या सामान्य बैंक लॉकर में रखना व्यावहारिक नहीं होता. यहीं से ऐसे हाई-सिक्योरिटी प्राइवेट वॉल्ट की जरूरत पैदा होती है.

सिंगापुर क्यों बन रहा है अमीरों का गोल्ड हब?
कुल मिलाकर सिंगापुर की कहानी तीन चीजों पर टिकी है - सुरक्षा, स्थिरता और कनेक्टिविटी. एक तरफ यहां राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता है, दूसरी तरफ मजबूत बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था. इसके अलावा चांगी एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क की वजह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से यहां पहुंचना आसान है.

इसी वजह से दुनिया के रसूखदार लोग अपने सोने को सिर्फ तिजोरी में बंद रखने के बजाय ऐसी जगह रखना चाहते हैं, जहां उनकी संपत्ति सुरक्षित भी रहे और जरूरत पड़ने पर उस तक पहुंचना भी आसान हो. यही कारण है कि सिंगापुर अब दुनिया के बड़े गोल्ड स्टोरेज सेंटरों में अपनी जगह मजबूत करता नजर आ रहा है.

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