क्या आप जानते हैं अस्पतालों में MRI मशीन को कभी बंद क्यों नहीं किया जाता?

अस्पतालों में MRI मशीनों को बंद नहीं किया जाता है. आखिर इसे हमेशा चालू रखने की वजह क्या है? चलिए जानते हैं इसके पीछे की सच्चाई क्या है?

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अस्पतालों में लगे एमआरआई मशीन कभी बंद नहीं होते (Photo - AI Generated) अस्पतालों में लगे एमआरआई मशीन कभी बंद नहीं होते (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST

बड़े- बड़े अस्पतालों और टेस्टिंग लैब व स्कैन सेंटर में MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीन लगी होती है. एक बार चालू होने के बाद इसे कभी बंद ही नहीं किया जाता है. यह बिलकुल सच है. आज जानेंगे कि आखिर इस मशीन को हमेशा चालू रखने के पीछे वजह क्या है.

एमआरआई मशीन को बंद करना बिजली के स्विच को बंद करने जितना आसान नहीं है. जहां अधिकांश चिकित्सा उपकरण डिस्कनेक्ट होने पर खुद बंद हो जाते हैं. वहीं एमआरआई स्कैनर को बंद करने के लिए एक जटिल और खर्चीली प्रक्रिया होती है. इसे बंद करने में लाखों का खर्च आता है. इस वजह से इसे कभी बंद ही नहीं किया जाता है. क्योंकि, इस मशीन को चलाने के लिए जरूरी तकनीक ही कुछ ऐसी है. 

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इस मशीन में  सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट लगे होते हैं. इन चुंबकों को हमेशा एबसल्यूट जीरो यानी -269 डिग्री तक ठंडा रखना पड़ता है. इन्हें ठंडा रखने वाले लिक्विड हीलियम की वजह से ही मशीन को लगातार चालू रखना पड़ता है. क्योंकि, लिक्विड हीलियम एक स्पेशलाइज्ड क्रायोजन सर्कुलेशन सिस्टम के जरिए लगातार चुंबकों को ठंडा करता रहता है.  

एमआरआई मशीन को बंद करना पड़ता है काफी महंगा 
एमआरआई मशीन को बंद करना बेहद चुनौती पूर्ण और बेहद खर्चीला काम होता है. क्योंकि, इसे बंद करने का मतलब है. इसके शक्तिशाली चुंबक को बंद करना और इसके मैग्नेटिक एरिया के प्रभाव को बंद करना है. इस मशीन को बंद करने में दो अलग-अलग प्रोसेस होते हैं. इनके इन्वॉयरामेंटल और इकॉनमिकल इफेक्ट अलग-अलग होते हैं. जब एमआरआई स्कैनर को बंद करना होता है, तो इस मैंग्नेटिक एरिया को सीधे बंद नहीं किया जा सकता. इसके बजाय, तकनीशियनों को इसके सेंसेटिव फैक्टर्स को नुकसान पहुंचाए बिना शक्तिशाली मैग्नेटिक एरिया को सुरक्षित तरीके से खत्म करना होता है. 

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इसके लिए एक कंट्रोल प्रोसेस के जरिए से मैंग्नेटिक सिस्टम को सावधानीपूर्वक बंद करना पड़ता है. इस कंट्रोल शटडाउन को रैंप डाउन कहा जाता है. इसके लिए मैग्नेट पावर सप्लाई नाम के एक विशेष डिवाइस की जरूरत होती है . यह विशेष प्रणाली व्यवस्थित रूप से मैग्नेट कॉइल्स से बहने वाले करंट को हटा देती है. इससे लिक्विड हीलियम संरक्षित रहता है जो -452.2 डिग्री फ़ारेनहाइट पर सुपर कंडक्टिविटी बनाए रखता है.

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हीलियम की मात्रा काफी सीमित है. ऐसे में एमआरआई मशीन को बंद करने से इसके नष्ट होने का खतरा बना रहता है. हीलियम की कीमत रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है. इससे एमआरआई प्रबंधन की इकोनॉमी प्रभावित होती है. यही बड़ी वजह है कि एमआरआई मशीन को बंद करना आर्थिक रूप से काफी महंगा साबित होता है. एक बार इसे बंद करने और फिर चालू करने में 30,000 से 40,000 डॉलर तक का खर्च आ सकता है. इस वजह से मशीन को चालू ही रखा जाता है. 

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