दीवार के बीच लोहे की जाली क्यों डालते हैं कारीगर? ये है वजह

इन दिनों घर बनाने के दौरान मिस्त्री सिंगल ब्रिक यानी 4 इंच की दीवार या पार्टिशन वॉल में लोहे की जाली डालते दिख जाते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर कारीगर ऐसा क्यों करते हैं और इसके क्या फायदे हैं?

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पतली दीवार बनाते वक्त ईंटों के बीच लोही की जालीदार पट्टी लगाने के ये हैं फायदे (Photo - AI Generated) पतली दीवार बनाते वक्त ईंटों के बीच लोही की जालीदार पट्टी लगाने के ये हैं फायदे (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

घर बनाते समय आजकल जब पतली दीवार खड़ी करते समय, ईंट के लेयर की बीच मसाले के साथ लोहे की जाली भी बिछाई जा रही है. ऐसा करने के पीछे आखिर वजह क्या है? इन लोहे की जालीदार पट्टी को क्या कहते हैं और ईंटों के लेयर के बीच इसे लगाने के क्या फायदे हैं?

आजकल घर की लागत कम करने और कमरों में ज्यादा स्पेस के चक्कर में लोग बीच की पार्टिशन दीवार 4 इंच की रखते है. इन पतली दीवारों को बनाते वक्त कारीगर ईंटों के लेयर के बीच लोहे की जालीदार पट्टियां लगा रहे हैं.  इन्हें मैश स्ट्रिप्स या लैडर वायर कहा जाता है. यह दीवार को मजबूती देने और भविष्य में उसमें आने वाली दरारों  को रोकने के लिए लगाई जाती हैं.

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जब हम पतली दीवार बनाते हैं, तो उसकी अपनी चौड़ाई बहुत कम होने के कारण उसमें खुद को संभालने की ताकक मोटी दीवारों के मुकाबले काफी कम होती है. इस जालीदार पट्टी को लगाने के कई फायदे हैं, जिस वजह से आधुनिक कंस्ट्रक्शन में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है. 

लोही की मेश स्ट्रिप्स लगाने के ये हैं फायदे
पहला, यह दीवार को आपस में बांधकर रखती है. पतली दीवारें थोड़ी सी भी हलचल या कंपन होने पर जल्दी कमजोर हो सकती हैं. यह जालीदार पट्टी दीवारों में ईंटों की पकड़ को और अधिक मजबूत बनाती है. यह ईंटों की परतों को एक साथ लॉक कर देती है जिससे दीवार एक ठोस ढांचे की तरह खड़ी रहती है.

दूसरा, मौसम बदलने पर यानी गर्मी और सर्दी में सीमेंट, ईंट और कंक्रीट अलग-अलग फैलती और सिकुड़ते हैं. इससे दीवार में क्रैक्स आने की संभावना बढ़ जाती है. इसके अलावा मकान के बैठने या किसी भी खिंचाव के कारण प्लास्टर और दीवारों में दरार पड़ने  का खतरा रहता है. यह जाली एक स्टेबलाइजिंग फ्रेमवर्क की तरह काम करती है जो तनाव को पूरी दीवार पर समान रूप से बांट देती है और दरारें नहीं आने देती .

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इस स्ट्रिप्स की वजह से भूकंप और झटकों से दीवारें सुरक्षित रहती हैं.  भूकंप के हल्के झटकों या घर के पास से भारी वाहनों के गुजरने से होने वाले कंपन को पतली दीवारें झेल नहीं पातीं. लोहे की यह जालीदार स्ट्रिप दीवार को लचीलापन और मजबूती देती है, जिससे दीवार बीच से टूटकर गिरती नहीं है.

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अगर आप यह जाली दीवार के बीच के अलावा कॉलम यानी पिलर और दीवार के जोड़ पर भी देख रहे हैं, तो इसे चिकन मेश या फाइबर मेश कहा जाता है. चूंकि कंक्रीट का पिलर और ईंट की दीवार दोनों अलग-अलग चीजें हैं. इसलिए तापमान में बदलाव के कारण दोनों के जोड़ अलग-अलग खिंचते हैं. वहां प्लास्टर करने से पहले इस जाली को लगाने से पिलर और दीवार के जोड़ पर कभी भी खड़ी दरार नहीं आती है.

इस तरह यह लोहे की जालीदार स्ट्रिप्स पतली दीवार की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करती है. ताकि आपकी दीवार सालों-साल बिना किसी दरार के सुरक्षित खड़ी रहे.

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