28 अक्टूबर 1886 को एक लोकार्पण समारोह के दौरान स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का अंतिम हिस्सा इसमें जोड़ा गया और इसे लोगों को समर्पित कर दिया गया. इस इवेंट की अध्यक्षता प्रेसिडेंट क्लीवलैंड ने की और जिसमें कई फ्रेंच और अमेरिकी गणमान्य लोग शामिल हुए. आज स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी अमेरिका का एक लैंडमार्क है. इसे फ्रांस ने अमेरिका को गिफ्ट किया था. यह दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक है.
स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी फ्रांस के लोगों की ओर से अमेरिका के लोगों को दोस्ती का एक उपहार है. इसे राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड ने न्यूयॉर्क हार्बर में 28 अक्टूबर 1886 को लोगों को समर्पित किया था.मूल रूप से "लिबर्टी एनलाइटनिंग द वर्ल्ड" के रूप में जानी जाने वाली इस प्रतिमा को फ्रांस के एडौर्ड डी लाबोले ने अमेरिकी क्रांति के दौरान फ्रेंको-अमेरिकी गठबंधन की याद में प्रस्तावित किया था.
फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडरिक-ऑगस्टे बार्थोल्डी ने इसे डिजाइन किया था. 151 फीट की यह प्रतिमा एक महिला के रूप में है. इसके हाथ में एक मशाल है. विशाल स्टील के सपोर्ट से बने इसके ढांचे को यूजीन-इमैनुएल वायलेट-ले-ड्यूक और एलेक्जेंडर-गुस्ताव एफिल ने तैयार किया था, जो पेरिस में एफिल टॉवर के अपने डिजाइन के लिए प्रसिद्ध थे.
फरवरी 1877 में अमेरिकी कांग्रेस ने न्यूयॉर्क के बेडलो द्वीप पर एक साइट को इस विशाल प्रतिमा को स्थापित करने के लिए मंजूरी दी थी. इसका सुझाव बार्थोल्डी ने दिया था. मई 1884 में, प्रतिमा का निर्माण फ्रांस में पूरी हो गई और तीन महीने बाद अमेरिकियों ने न्यूयॉर्क हार्बर में इसके फाउंडेशन की आधारशिला रखी.
जून 1885 में, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के अलग-अलग हिस्से 200 से अधिक डिब्बों में बंद होकर नई दुनिया में पहुंची. इसकी तांबे की चादरों को फिर से जोड़ा गया और स्मारक की आखिरी कील 28 अक्टूबर, 1886 को राष्ट्रपति क्लीवलैंड की अध्यक्षता में एक समारोह के दौरान लगाई गई. इस मौके पर कई फ्रांसीसी और अमेरिकी गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए.
1924 में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को एक राष्ट्रीय स्मारक बनाया गया और 1956 में बेडलो के द्वीप का नाम बदलकर लिबर्टी आइलैंड कर दिया गया. 1980 के दशक में इस प्रतिमा का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार किया गया.
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