राम मंदिर के CEO के लिए इंटरव्यू शुरू... जो सेलेक्ट होगा, उनका काम क्या होगा?

Ram Mandir CEO Recruitment: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू किए जा रहे हैं. तो जानते हैं जो सीईओ बनेगा, उनका क्या काम होगा.

Advertisement
राम मंदिर सीईओ की भर्ती के लिए इंटरव्यू किए जा रहे हैं. (Photo: PTI) राम मंदिर सीईओ की भर्ती के लिए इंटरव्यू किए जा रहे हैं. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:40 AM IST

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के पद के लिए चयन प्रक्रिया शुरू हो गई है. अभी इस पद के चयन के लिए इंटरव्यू किए जा रहे हैं. देशभर से सीईओ पद के लिए 5300 आवेदन आए थे और इंटरव्यू के लिए 18 उम्मीदवारों को सेलेक्ट किया गया था. अब इनके इंटरव्यू किए जा रहे हैं, जिसके बाद फाइनल नाम सामने आएगा. ऐसे में सवाल है कि आखिर ट्रस्ट में सीईओ का काम क्या होगा और क्यों इस पद पर उम्मीदवारों का चयन किया जा रहा है. 

Advertisement

सीईओ कौन बनेगा और क्या सैलरी होगी?

आधिकारिक नोटिस के अनुसार, जो भी सीईओ बनेगा वो 3 साल तक रहेगा. लेकिन, अगर काम अच्छा रहता है तो उनकी सेवा को आगे बढ़ाया जा सकता है. वहीं,सैलरी की बात करें तो ये आपसी बातचीत के बाद तय की जाएगी. इस पद के लिए उन लोगों ने अप्लाई किया था, जो कम से कम ग्रेजुएट हो. साथ ही उनकी उम्र 50 से 70 साल के बीच हो. 

इस पद के लिए अनुभव की भी डिमांड की गई थी और उम्मीदवार को किसी बड़े सार्वजनिक संगठन/संस्था/विभाग/कंपनी में प्रबंधकीय दायित्व निभाने का कम से कम 20 साल का अनुभव होना चाहिए था. नोटिस में खास तौर पर कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया में मंदिर/हिंदू धार्मिक संस्था के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी. साथ ही उम्मीदवार का सक्रिय  हिंदू होना जरूरी है. 

Advertisement

क्या होगा सीईओ का काम? 

आधिकारिक नोटिस के अनुसार, सीईओ को संस्था के कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय काम संभालने होंगे. साथ ही संस्था के काम करने के तरीके और नियम-कायदे तय करने होंगे और उन्हें बेहतर बनाने के लिए काम करना होगा. सीईओ को संस्था के उद्देश्यों के हिसाब से पूरा संगठन तैयार करना है और उसका संचालन करना है. इसके  अलावा चुने जाने वाले सीईओ को  संस्था के अधिकारियों, सेवकों और कर्मचारियों के कामकाज की निगरानी करना है और उनके प्रमुख अधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभालना  है. 

साथ ही मंदिर और संस्था के मौजूदा कामों को सुचारू रूप से चलाना और भविष्य में होने वाले विकास की योजना बनाना, कानून, सरकारी नियमों और ट्रस्ट डीड में दी गई जरूरी शर्तों का पालन सुनिश्चित करना, संस्था के पैसे, खातों और वित्तीय रिकॉर्ड में पारदर्शिता और कामकाज में दक्षता बनाए रखना, मंदिर और संस्था की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखना और जरूरत पड़ने पर स्थानीय, राज्य और केंद्र सरकार के साथ तालमेल करना,  मंदिर में होने वाली पूजा-पाठ, धार्मिक उत्सव और दूसरे धार्मिक कार्यक्रम नियमित और व्यवस्थित तरीके से करवाना भी उनका दायित्व रहेगा. 

ये भी रहेंगे कर्तव्य

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधाओं और उनकी संतुष्टि का ध्यान रखना.
समय-समय पर आने वाले खास मेहमानों और प्रमुख संतों के लिए उचित व्यवस्था करना.
राम मंदिर और संस्था की प्रतिष्ठा बढ़ाने और सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने में योगदान देना.
संस्था की संपत्तियों की सुरक्षा करना और नियमों के मुताबिक उनका इस्तेमाल/निवेश करना.
ट्रस्ट डीड में तय उद्देश्यों को पूरा करने के लिए योजनाएं बनाना और उन्हें ट्रस्टी मंडल और महामंत्री के निर्देश में प्रभावी तरीके से लागू करना.
न्यास और महामंत्री के निर्देश पर समय-समय पर सौंपे गए दूसरे काम भी करना.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »