चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी वोटर लिस्ट से कट गया है. दरअसल, वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा के नाम को ASDD लिस्ट में शामिल किया गया है और उनके नाम के आगे 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' (Permanently Shifted) दर्ज किया गया है. ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने के बाद राघव चड्ढा की भी प्रतिक्रिया सामने आई है और उन्होंने इसे 'राजनीतिक बदले की भावना' से की गई कार्रवाई बताया है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये ASDD लिस्ट क्या है और किस वजह से इसमें नाम आ जाता है और इसका प्रोसेस क्या होता है. तो जानते हैं इस सवालों के जवाब और बताते हैं कि अगर किसी का इसमें नाम आ जाए तो क्या होता है?
कैसे हट जाता है नाम?
दरअसल, चुनाव आयोग जो एसआईआर करवा रहा है, इसमें वोटिंग लिस्ट को अपडेट किया जा रहा है. उसमें उन लोगों के नामों को हटाया जा रहा है, जो पुराने पते से कहीं दूसरी जगह शिफ्ट कर गए हैं, उनकी मृत्यु हो गई है, उनका नाम दो जगह है या वो विदेशी है. इस प्रोसेस को पूरा करने के लिए बीएलओ अपने क्षेत्र के हर घर में जाते हैं और वोटर लिस्ट को वेरिफाई कर रहे हैं, जिसका एक प्रोसेस है. इस स्थिति में अगर कोई वोटर घर पर नहीं मिलता है तो उसके नाम पर कार्रवाई की जाती है.
ऐसा नहीं है कि एक बार घर पर ना मिले तो कार्रवाई हो जाती है. बीएलओ अपने स्तर पर बार-बार चेक करते हैं और पता करते हैं कि वो वोटर अभी कहां है. बीएलओ के बार-बार चेक करने के बाद भी वोटर नहीं मिलता है तो उसका नाम ASDDF लिस्ट में डाल दिया जाता है. इसका मतलब है वो लिस्ट, जिसमें एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट और फॉरेनर वोटर्स के नाम होते हैं. जिनका नाम इस लिस्ट में होता है, उन्हें ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिया जाता है. आप नीचे देख सकते हैं कि किस का नाम किस कैटेगरी में रखा जाता है...
एब्सेंट- अगर लिस्ट में आपने नाम के आगे एब्सेंट है तो इसका मतलब है कि वोटर से बार-बार कोशिश के बाद संपर्क नहीं हो सका और वो घर पर नहीं मिले. लेकिन, इसका मतलब ये नहीं है कि वो कहीं शिफ्ट हो गए हैं, बस वो कुछ वक्त से वहां नहीं है.
शिफ्टेड- अगर लिस्ट में शिफ्टेड है तो ये मान लिया गया है कि वोटर किसी दूसरी जगह रहने लगे हैं. जैसे कोई किराएदार कहीं रहता था और वो शिफ्ट हो गया. या किसी ने घर बदल लिया या किसी दूसरी जगह रहने लगा.
डेड- अगर किसी वोटर की मृत्यु हो चुकी हो तो उसके आगे डेड लिखकर नाम काट दिया जाता है.
डुप्लीकेट- अगर बीएलओ को पता चलता है कि उनका नाम दो जगह है तो इस स्थिति में डुप्लीकेट बताकर नाम काट दिया जाता है.
फॉरेनर- वहीं अगर कोई वोटर विदेशी मिलता है तो उसका नाम फॉरेनर बताकर काट दिया जाता है.
कब हटता है नाम?
ऐसा नहीं है कि शिफ्ट हो चुके वोटर का नाम तुरंत हटा दिया जाता है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 22 के तहत, मतदाता निबंधन अधिकारी यानी ईआरओ और BLO स्थाई रूप से शिफ्ट हुए व्यक्ति के नाम को हटाने से पहले उचित सत्यापन करते हैं. इसके तहत मतदाता को उसके वोटर पहचान पत्र के जरिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर नोटिस जारी करते हैं. अगर
कोई नागरिक या स्वयं मतदाता नाम हटाने के लिए आवेदन करता है, तो उसे फॉर्म-7 भरना होता है.
कैसे जुड़ता है नाम?
अगर आपका नाम पुराने पते से कट गया है या आप नए पते पर वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं, तो दो विकल्प होते हैं. पहला ये है कि निवास स्थान परिवर्तन यानी Shifting of Residence के लिए फॉर्म-8 भरा जाता है. यह फॉर्म तब भरा जाता है जब आप वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र के भीतर या किसी दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में नए पते पर शिफ्ट हुए हों. लेकिन इससे आपकी पुरानी मतदाता पहचान और चुनावी रिकॉर्ड बरकरार रहता है.
दूसरा विकल्प नए मतदाता के रूप में पंजीकरण है. अगर ड्राफ्ट लिस्ट से आपका नाम पूरी तरह हट चुका है और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है तो आपको फॉर्म-6 भरना होगा. फॉर्म-6 के साथ आपको नए पते का प्रमाण जैसे आधार कार्ड, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट आदि और जन्मतिथि का प्रमाण संलग्न करना होगा, जो जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट आदि हैं. नए फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने पर कई बार पुराना चुनावी इतिहास नए पते के रिकॉर्ड से अलग हो सकता है.
आप निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल वोटर सर्विस पोर्टल पर जाकर या वोटर हेल्पलाइन ऐप के माध्यम से लॉग-इन करके सीधे फॉर्म-6 या फॉर्म-8 ऑनलाइन भर सकते हैं. इसके अलावा आप अपने क्षेत्र के संबंधित BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) या ERO कार्यालय में जाकर भी भौतिक रूप से फॉर्म भरकर और आवश्यक दस्तावेज जमा करके यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
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