मॉनसून में लेंटर डलवा लें? घर बनवाने का सबसे सही समय कौनसा है

क्या मॉनसून में घर का लेंटर डलवाना चाहिए या बारिश खत्म होने का इंतजार करना बेहतर है? क्या ताजा कंक्रीट पर बारिश का सीधा असर पड़ सकता है. इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं.

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नींव खोदने का काम मॉनसून में ज्यादा मुश्किल होता  (Photo: Ai Generated) नींव खोदने का काम मॉनसून में ज्यादा मुश्किल होता (Photo: Ai Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

मॉनसून के दौरान घर बनवा रहे लोगों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है -क्या इस मौसम में लेंटर डलवाना ठीक रहेगा, या बारिश थमने का इंतज़ार करना बेहतर होगा? जवाब न पूरी तरह 'हां' है, न पूरी तरह 'ना'. यह इस बात पर निर्भर करता है कि बारिश कितनी तेज है और साइट पर कितनी तैयारी है.

BIS भारत सरकार की वो संस्था है जो प्रोडक्ट्स और कंस्ट्रक्शन प्रैक्टिसेज़ के लिए क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड तय करती है. उसके मुताबिक, स्ट्रक्चरल कंक्रीट में पानी-सीमेंट का अनुपात 0.40 से 0.55 के बीच रखा जाना चाहिए, जो एक्सपोजर कंडीशन पर निर्भर करता है.

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अगर ताजा कंक्रीट पर बारिश का पानी सीधे गिर जाए, तो यह तय अनुपात बिगड़ जाता है, जिससे कंक्रीट की मजबूती और सतह की क्वालिटी दोनों प्रभावित हो सकती हैं. अगर ऐसा हुआ तो इससे कंक्रीट कमजोर पड़ सकती है और सतह भी खराब हो सकती है. इसलिए तेज या लगातार बारिश के अनुमान के बीच लेंटर डालने से बचना ही समझदारी है.

हल्की बारिश हो तो क्या करें

अगर हल्की बारिश की ही संभावना है, तो काम रोकने की जरूरत नहीं. बस पूरे लेंटर को तिरपाल या वाटरप्रूफ कवर से ढकने का पूरा इंतजाम पहले से रखें, ताकि अचानक बारिश आने पर ताज़ा कंक्रीट सुरक्षित रह सके.

नींव खोदने का काम मॉनसून में ज़्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि गीली मिट्टी अस्थिर हो जाती है, लेकिन अगर नींव पहले से तैयार है और ऊपर का स्ट्रक्चर बन रहा है, तो साइट इंजीनियर की निगरानी में काम जारी रखा जा सकता है.

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दिलचस्प बात यह है कि छत या टैरेस जैसी सपाट सतहों पर हल्की बारिश का पानी जमा होना (पॉन्डिंग) असल में क्योरिंग के लिए फायदेमंद भी माना जाता है, बशर्ते कंक्रीट अपना शुरुआती सेटिंग टाइम पूरा कर चुकी हो.

क्योरिंग कितने दिन जरूरी

BIS कोड IS 456 के मुताबिक कंक्रीट की क्योरिंग का न्यूनतम समय 10 दिन तय है. क्योरिंग का मतलब है- कंक्रीट डालने के बाद उसे एक तय समय तक लगातार गीला और नम रखना, ताकि वो सही तरीके से मज़बूत बन सके. हालांकि सीमेंट के किस्म के हिसाब से यह अवधि अलग हो सकती है.

यह भी पढ़ें: क्या है वो फॉर्मूला, जिससे 5 मिनट में पता चलेगा घर बनाने में कितना खर्चा आएगा?

OPC सीमेंट में सामान्यतः 7 दिन, जबकि PPC/PSC सीमेंट में इससे ज्यादा दिन क्योरिंग की सलाह दी जाती है. क्योरिंग कंक्रीट की मजबूती और टिकाऊपन के लिए सबसे जरूरी और सबसे सस्ती प्रक्रिया मानी जाती है, फिर भी साइट पर सबसे ज़्यादा नजरअंदाज की जाती है.

लेंटर डालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान:

अगले 24-48 घंटे का मौसम पूर्वानुमान जरूर चेक करें.पूरे लेंटर को ढकने लायक तिरपाल पहले से तैयार रखें. बारिश के डर से कंक्रीट मिक्स में एक्स्ट्रा पानी न मिलाएं, इससे मिश्रण का अनुपात बिगड़ जाता है. क्योरिंग सही तरीके से करें.बारिश को क्योरिंग का विकल्प न समझें.लेंटर की मोटाई, सरिया और डिज़ाइन जैसी बातें नक्शे और लोड के हिसाब से इंजीनियर से तय कराएं.

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फिर घर बनाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

घर बनाने के लिए पूरे भारत में कोई एक महीना हर जगह सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता. मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से समय बदल सकता है. फिर भी सामान्य तौर पर बारिश का सबसे तेज दौर खत्म होने के बाद का समय निर्माण के लिए ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है.

बारिश के दौरान नींव की खुदाई में खास परेशानी हो सकती है, क्योंकि मिट्टी गीली और अस्थिर हो सकती है. अल्ट्राटेक की गाइड के मुताबिक, मॉनसून में शुरुआती निर्माण यानी नींव के काम में बारिश की वजह से मिट्टी के अस्थिर होने जैसी समस्या आ सकती है.

वहीं, अगर नींव पहले से तैयार है और स्ट्रक्चर का काम आगे बढ़ चुका है, तो हल्की बारिश के बीच कुछ निर्माण कार्य जारी रखे जा सकते हैं. लेकिन हर चरण पर साइट इंजीनियर की निगरानी जरूरी है.

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