एक रुपये का सिक्का बनाने में सरकार के कितने पैसे खर्च होते हैं?

कई बार सवाल उठता है कि 1 रुपये का सिक्का बनाने में उसके वैल्यू से ज्यादा खर्च हो जाता है. आसान शब्दों में कहें तो एक रुपये का सिक्का ढालने में 1 रुपये से ज्यादा का खर्च ही आ जाता है. चलिए जानते हैं ये सिर्फ बातें ही हैं या इनमें सच्चाई भी है.

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सरकार को अलग- अलग वैल्यू के सिक्के बनाने में खर्चा भी अलग- अलग होता है (Photo - Pexels) सरकार को अलग- अलग वैल्यू के सिक्के बनाने में खर्चा भी अलग- अलग होता है (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के टकसाल 1, 2, 5, 10 और 20 रुपये के सिक्के ढालते हैं. इन सिक्कों को भी ढालने में भी पैसे खर्च होते हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर एक सिक्का को बनाने में कितने खर्च होते होंगे. कहीं ऐसा तो नहीं है कि एक रुपये के एक सिक्के की ढलाई में उस सिक्के के वैल्यू से ज्यादा खर्च हो जाता है. चलिए जानते आखिर सिक्कों की ढलाई पर सरकार के कितने खर्च होते हैं. 

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2018 में इंडिया टुडे ने एक आरटीआई दायर की थी. इसमें सूचना के अधिकार के तहत रिजर्व बैंक से सिक्कों की ढलाई करने में आने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा गया था. आरटीआई अनुरोध का जवाब देते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने खुलासा किया कि एक रुपये के सिक्के बनाने की औसत लागत 1 रुपये 11 पैसे हैं. यानी एक रुपया का सिक्का बनाने का खर्चा में उसके वैल्यू से 11 पैसा  अधिक था. आज इतने सालों बाद इस आंकड़े में थोड़ी बहुत बदलाव हो सकती है. 

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि 1 रुपये के सिक्के के मूल्य से ज्यादा उसे बनाने का कोस्ट होता है. सभी सिक्कों के साथ ऐसा नहीं है. 2, 5 और 10 रुपये के सिक्के बनाने में उसके मूल्य से कम खर्च होता है. 

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1 रुपये से बड़े सिक्के ढालने में कितना होता है खर्च
उस वक्त आरटीआई में दी गई जानकारी के मुताबिक,  2 रुपये के सिक्के बनाने में सरकार के 1 रुपये 28 पैसे खर्च होते हैं. वहीं 5 के सिक्के ढालने में 3.69 रुपये लगते हैं और 10 रुपये के सिक्के बनाने में 5 रुपये 54 पैसे का खर्च आता है. भारत सरकार की टकसाल (मुंबई) 10, 5, 2  और 1 रुपये के सिक्के ढालने का काम करती है. 

10 रुपये का सिक्का बाई मेटलिक करंसी कॉइन कहलाता है. इसका मतलब होता है कि वह सिक्का दो अलग-अलग धातुओं या मिश्रधातुओं से मिलकर बना है. इसमें बाहरी रिंग एल्युमिनियम ब्रॉन्ज या निकल ब्रास से बना होता है. वहीं अंदर का कोर कॉपर-निकेल या निकेल- सिल्वर का होता है. इसलिए इसमें BI कोड होता है.

वहीं 1 और 2 रुपये के सिक्के के साथ FSS कोड रहता है. इसका मतलब फेरिटिक स्टेनलेस स्टील होता है. यानी ये सिक्के स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं. वहीं 5 रुपये वाले सिक्के में Ni-Br लिखा होता है, इसका मतलब है कि यह निकेल-ब्रास से बना हुआ है. 

ये जानकारी 2018 में दी गई थी. इतने सालों बाद भी इन्हें बनाने के लागत मूल्य में थोड़ा बदलाव हो सकता है. लेकिन, इससे सिक्का ढालने का का सिस्टम साफ हो जाता है. आखिर हम हर दिन छोटी- छोटी जरूरतों को पूरा करने में जो सिक्का यूज करते हैं. उसे बनाने में कितना खर्च होता है और इसे किस मटेरियल से बनाया जाता है.  

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