कई बार घर में बिजली का इस्तेमाल पहले जितना ही होता है, लेकिन महीने के आखिर में बिल अचानक बढ़कर आ जाता है. ऐसे में लोगों को लगता है कि बिजली का मीटर तेजी से चलने लगा है. कुछ लोग मीटर खराब होने का शक करते हैं, तो कुछ बिना जांच कराए ही उसे बदलवाने की सोचने लगते हैं. लेकिन बिजली का बिल बढ़ने के पीछे सिर्फ मीटर खराब होना ही वजह नहीं है. घर में एसी, गीजर, हीटर या दूसरे बिजली के उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल, किसी उपकरण में खराबी या बिल में रीडिंग की गड़बड़ी भी इसकी वजह हो सकती है.
अगर आपको लग रहा है कि मीटर पहले से ज्यादा तेजी से चल रहा है, तो सबसे पहले उसकी रीडिंग नोट कर लें. मीटर पर दिखाई देने वाले यूनिट यानी kWh के आंकड़े को लिख लें या उसकी फोटो खींच लें. कुछ घंटे बाद दोबारा रीडिंग देखकर अंतर समझें. इस दौरान घर में इस्तेमाल हो रहे बिजली के उपकरणों पर भी ध्यान दें. अगर एसी, गीजर, पानी की मोटर या दूसरे ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण चल रहे हैं, तो मीटर की रीडिंग तेजी से बढ़ सकती है. सिर्फ मीटर की लाइट तेजी से चमकने या डिस्प्ले बदलने से यह तय नहीं किया जा सकता कि मीटर खराब है.
बिजली का बिल पुराने महीनों से मिलाएं
कई बार मीटर तेज चलने के बजाय बिजली का इस्तेमाल ही बढ़ जाता है. इसलिए मौजूदा बिल की तुलना पिछले दो-तीन महीनों के बिल से करें.
इन बातों को जरूर देखें:
- इस महीने कितने यूनिट बिजली खर्च हुई?
- क्या पहले के मुकाबले एसी या गीजर ज्यादा चला है?
- क्या बिजली की दर या बिल में कोई दूसरा चार्ज बदला है?
- क्या मीटर की रीडिंग सही दर्ज की गई है?
अगर यूनिट की खपत अचानक बहुत बढ़ गई है और घर में इस्तेमाल पहले जैसा ही है, तो इसकी वजह की जांच करना जरूरी है.
घर के बिजली के उपकरण भी चेक करें
कभी-कभी किसी खराब उपकरण या वायरिंग में गड़बड़ी के कारण बिजली की खपत बढ़ सकती है. पुराने फ्रिज, पानी की मोटर, गीजर और एसी जैसे उपकरणों की खराबी से भी बिजली ज्यादा खर्च हो सकती है. अगर आपको वायरिंग में खराबी का शक है, तो किसी इलेक्ट्रीशियन से चेक कराएं. खुद मीटर के तारों, सील या बिजली के कनेक्शन को छूने की कोशिश न करें. इससे करंट लगने का खतरा हो सकता है.
मीटर तेज चलने का शक हो तो क्या करें?
अगर घर में बिजली का इस्तेमाल पहले जैसा है, लेकिन मीटर की रीडिंग असामान्य रूप से बढ़ रही है, तो अपनी बिजली वितरण कंपनी यानी डिस्कॉम में शिकायत दर्ज कराएं. आप कंपनी से मीटर की जांच या टेस्टिंग कराने का अनुरोध कर सकते हैं. जांच की प्रक्रिया और उसमें लगने वाला चार्ज संबंधित राज्य के नियमों के मुताबिक हो सकता है.
मीटर खराब निकले तो क्या होगा?
अगर जांच में मीटर तय मानकों के मुताबिक काम नहीं करता पाया जाता है, तो बिजली कंपनी लागू नियमों के अनुसार उसे ठीक करने या बदलने की कार्रवाई कर सकती है. बिल में सुधार भी जांच के नतीजे और संबंधित नियमों के मुताबिक हो सकता है. केंद्र सरकार के बिजली उपभोक्ता अधिकार नियमों में मीटर की टेस्टिंग और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था है.
फरवरी 2024 में किए गए संशोधन के मुताबिक, जब उपभोक्ता मीटर की रीडिंग और वास्तविक खपत में अंतर को लेकर शिकायत करता है, तो वितरण कंपनी को पांच दिनों के भीतर अतिरिक्त मीटर लगाने का प्रावधान किया गया है. यह अतिरिक्त मीटर कम से कम तीन महीने तक खपत की जांच के लिए इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, मीटर की जांच, उसे बदलने और पुराने बिल में सुधार की पूरी प्रक्रिया संबंधित नियमों और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी.
इन गलतियों से बचें
मीटर तेज चलने का शक होने पर खुद उसका कनेक्शन न हटाएं, किसी इलेक्ट्रिशियन से मीटर में बदलाव न कराएं. इससे बिजली का झटका लगने के साथ कानूनी परेशानी भी हो सकती है. अगर मीटर से जलने की स्मेल आ रही है, चिंगारी निकल रही है या उसके आसपास तार गर्म हो रहे हैं, तो उससे दूर रहें और बिजली कंपनी से तुरंत संपर्क करें. जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से बिजली की सप्लाई बंद करवाने के लिए योग्य इलेक्ट्रीशियन की मदद लें.
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