कॉर्निस डिजाइन क्या है? इसे लगाने से बढ़ जाती है घर की खूबसूरती

कॉर्निस डिजाइन एक ऐसी चीज है जो घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ छत और दीवार के जोड़ की मजबूती भी बरकरार रखता है. चलिए जानते हैं क्या होता कॉर्निस डिजाइन.

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कॉर्निस डिजाइन घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ जोड़ों को मजबूत भी बनाता है (Photo - AI Generated) कॉर्निस डिजाइन घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ जोड़ों को मजबूत भी बनाता है (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

घर बनवाते समय हम दीवारों के रंग, फर्नीचर, फॉल्स सीलिंग और लाइटिंग पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन एक छोटी सी चीज अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. यह है दीवार और छत के बीच का खाली जोड़. देखने में भले ही यह मामूली लगे, लेकिन इसी जगह पर लगाया गया कॉर्निस डिजाइन पूरे कमरे की खूबसूरती बढ़ा सकता है. खास बात यह है कि कॉर्निस सिर्फ सजावट के काम नहीं आता, बल्कि दीवार और छत के बीच के जोड़ को भी छिपाता है.

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कई बार आपने किसी कमरे में कदम रखते ही महसूस किया होगा कि यहां सब कुछ कितना सलीके से सजा हुआ है. फर्नीचर साधारण है, दीवारों पर भी कोई खास डिजाइन नहीं है, लेकिन फिर भी कमरा आकर्षक नजर आता है. इसकी एक वजह दीवार और छत के बीच लगा कॉर्निस हो सकता है. सही डिजाइन और लाइटिंग के साथ यह कमरे को एक नया लुक दे सकता है.

क्या होता है कॉर्निस और कहां किया जाता है इसका इस्तेमाल?
कॉर्निस एक तरह की सजावटी पट्टी या मोल्डिंग होती है, जिसे दीवार और छत के मिलने वाली जगह पर लगाया जाता है. इसका मुख्य काम दोनों सतहों के बीच बने जोड़ को ढकना और कमरे को बेहतर फिनिश देना है.

आमतौर पर दीवार और छत जहां मिलते हैं, वहां एक सीधा और कठोर कोना बनता है. कॉर्निस इस कोने को ढककर उसे ज्यादा सुंदर और सलीकेदार बना देता है. यही वजह है कि आजकल घरों में कॉर्निस का इस्तेमाल सिर्फ सजावट के लिए ही नहीं, बल्कि कमरे को पूरा और व्यवस्थित लुक देने के लिए भी किया जाता है.

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कॉर्निस का डिजाइन कमरे की बनावट और छत की ऊंचाई के हिसाब से चुना जाता है. छोटे कमरे में हल्का और सिंपल डिजाइन अच्छा लगता है, जबकि बड़े कमरों में थोड़ा उभरा हुआ या डिजाइनदार कॉर्निस लगाया जा सकता है.

पीओपी से लेकर पीवीसी तक, इन चीजों से बनता है कॉर्निस
कॉर्निस बनवाने के लिए कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इनमें पीओपी, जिप्सम और पीवीसी प्रमुख हैं. हर सामग्री की अपनी खासियत है और इसका चुनाव डिजाइन, बजट और जरूरत के हिसाब से किया जा सकता है.

पीओपी कॉर्निस - प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी से मनचाहे आकार और डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं. अगर आप अपने घर में बारीक नक्काशी या कस्टम डिजाइन वाला कॉर्निस लगवाना चाहते हैं, तो यह एक विकल्प हो सकता है.

जिप्सम कॉर्निस - जिप्सम से बने कॉर्निस साफ-सुथरे और आधुनिक डिजाइन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. खासकर उन घरों में जहां सादगी के साथ आकर्षक फिनिश चाहिए, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

पीवीसी कॉर्निस - अगर बजट कम है और आप दीवार-छत के जोड़ को सुंदर बनाना चाहते हैं, तो पीवीसी कॉर्निस पर विचार कर सकते हैं. यह कम बजट में सजावटी फिनिश देने का विकल्प है.

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कॉर्निस और मोल्डिंग में क्या अंतर है?
कॉर्निस और मोल्डिंग को कई बार एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों में अंतर है. मोल्डिंग सजावटी पट्टियों और डिजाइनदार किनारों की एक बड़ी श्रेणी है. इसमें घर के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल होने वाली कई तरह की पट्टियां शामिल होती हैं.

वहीं, कॉर्निस मोल्डिंग का ही एक प्रकार है, जिसे खासतौर पर दीवार और छत के जोड़ पर लगाया जाता है. दरवाजों के फ्रेम और फर्श के पास लगने वाली स्कर्टिंग भी मोल्डिंग के उदाहरण हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर होता है.

एलईडी लाइटिंग वाला कॉर्निस बदल देता है कमरे का लुक
आजकल घरों में कॉर्निस का इस्तेमाल सिर्फ दीवार और छत के जोड़ को ढकने तक सीमित नहीं है. इसमें एलईडी लाइटिंग जोड़कर कमरे को आकर्षक बनाया जा सकता है.

कॉर्निस में एलईडी लाइट लगाने से रोशनी सीधे आंखों पर नहीं पड़ती, बल्कि छत या दीवार की तरफ फैलती है. इससे कमरे में हल्की और आरामदायक रोशनी का माहौल बनता है. खासकर रात के समय यह लाइटिंग कमरे को अलग ही लुक देती है.

भारतीय घरों में एलईडी लाइटिंग वाला कॉर्निस एक उपयोगी विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे सजावट और रोशनी दोनों का काम हो जाता है. हालांकि, इसके लिए कॉर्निस का डिजाइन और लाइट लगाने की जगह पहले से तय करना जरूरी है.

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