NEET एडमिशन में बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़, UP के लोगों ने उत्तराखंड में बनवाए फर्जी प्रमाण पत्र

NEET काउंसलिंग के बीच उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों का मामला सामने आने के बाद अब जांच बाजपुर तक पहुंच गई है. सत्यापन में ऐसे दस्तावेज मिले, जिनके आधार पर दूसरे राज्य के लोगों ने मेडिकल एडमिशन के लिए उत्तराखंड का स्थायी और जाति प्रमाण पत्र बनवाया था.

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मेडिकल कॉलेज में फर्जी दस्तावेज से एडमिशन का मामला सामने आया है (Representational) मेडिकल कॉलेज में फर्जी दस्तावेज से एडमिशन का मामला सामने आया है (Representational)

रमेश चंद्रा

  • देहरादून,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

उत्तराखंड में मेडिकल एडमिशन से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्रों के मामले ने अब ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में भी हड़कंप मच गया है. मेडिकल कॉलेजों से आए स्थायी और जाति प्रमाण पत्रों के सत्यापन के दौरान ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिन पर प्रशासन को शक हुआ. दोबारा जांच हुई तो कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों से प्रमाण पत्र बनवाने का मामला सामने आया है.

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बाजपुर  की एसडीएम ऋचा सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री, कुमाऊं आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए इस्तेमाल हुए प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश मिले थे. इसी जांच के दौरान बाजपुर में मामले का खुलासा हुआ.

एसडीएम ने बताया कि कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेज लगाकर स्थायी और जाति प्रमाण पत्र बनवाए गए थे. दोबारा जांच में दो और मामले सामने आए. जब संबंधित लोगों को सत्यापन के लिए बुलाया गया तो उन्होंने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के रहने वाले हैं.

आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए उत्तराखंड के स्थायी और जाति प्रमाण पत्र तैयार कराए गए और इन्हीं के आधार पर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया गया. अधिकारियों के मुताबिक, सभी आरोपियों का कनेक्शन सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में हुए एडमिशन से सामने आया है.

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महिला समेत 5 पर मुकदमा

मामले में एक महिला समेत पांच लोगों के खिलाफ बाजपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है. प्रशासन ने आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया है. अधिकारियों ने प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर दस्तावेज तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाने के लिए पूछताछ की.

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यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तराखंड में मेडिकल एडमिशन को लेकर फर्जी प्रमाण पत्रों की व्यापक जांच चल रही है. इससे पहले राज्य में चार MBBS एडमिशन फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों के बाद रद्द किए जा चुके हैं और पांच लोगों के खिलाफ पुलिस केस दर्ज हुआ है.

क्या बड़े नेटवर्क तक पहुंचेगी जांच?

अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि प्रमाण पत्र कहां और कैसे तैयार किए गए. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे. अधिकारियों को आशंका है कि मामला सिर्फ कुछ प्रमाण पत्रों तक सीमित न होकर किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. फिलहाल बाजपुर से शुरू हुई यह जांच अब दस्तावेजों की पूरी कड़ी खंगाल रही है.

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