कीर्ति आजाद का तंज- चुनाव नहीं जीता, जेटली नहीं समझ सकते जनता का दर्द

कीर्ति आजाद ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था में धीमी है और इस तरह का कोई आरोप लगता है तो ऐसी परिस्थिति में आप अपेक्षा रखते हैं कि जो देश के वित्त मंत्री हैं वह गंभीरता से उसका जवाब देंगे. लेकिन वित्त मंत्री ने कहा कि सिन्हा 80 साल की उम्र में नौकरी ढूंढ रहा हैं, उनसे जो चीजें पूछी गईं उसका जवाब नहीं दिया और बात को मुद्दे से भटका दिया.

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सिन्हा के बचाव में उतरे सांसद कीर्ति आजाद सिन्हा के बचाव में उतरे सांसद कीर्ति आजाद

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:23 PM IST

अर्थव्यवस्था को लेकर यशवंत सिन्हा के बयान पर राजनीति तेज हो गई है. बीजेपी में ही अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने सिन्हा के बयान को सही ठहराया था अब यशवंत सिन्हा के बचाव में बीजेपी से सस्पेंड किए गए सांसद कीर्ति आजाद भी उतर आए हैं. कीर्ति आजाद से 'आजतक' से खास बातचीत में कहा है कि उन्होंने सिन्हा का लेख पढ़ा उस लेखन बहुत सारी गंभीर बातें थी. उन्होंने कहा कि अगले दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सवालों का जवाब देने की बजाय सिन्हा पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाए, जिसकी अपेक्षा नहीं थी.

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कीर्ति आजाद ने कहा कि अगर अर्थव्यवस्था में धीमी है और इस तरह का कोई आरोप लगता है तो ऐसी परिस्थिति में आप अपेक्षा रखते हैं कि जो देश के वित्त मंत्री हैं देंगे. लेकिन वित्त मंत्री ने कहा कि सिन्हा 80 साल की उम्र में नौकरी ढूंढ रहा हैं, उनसे जो चीजें पूछी गईं उसका जवाब नहीं दिया और बात को मुद्दे से भटका दिया.

अर्थव्यवस्था और जेटली पर पर सवाल उठाते हुए आजाद ने कहा कि आप चले गए इतिहास में, इतिहास को छोड़िए, 40 महीने का समय बीत चुका है, लोगों के बीच में हाहाकार मचा है. उन्होंने कहा कि हम भी अपने क्षेत्रों में जाते हैं तो लोग सवाल पूछते हैं, बार-बार जीएसटी और नोटबंदी के बारे में सवाल पूछते हैं. कीर्ति ने कहा कि हम यह चाहते हैं कि कम से कम लोगों को वित्त मंत्री आ कर समझाएं. समझा-बुझाकर लोगों को बताएं कि अगर कठोर कदम उठाए गए हैं तो किस प्रकार से ठीक होगा या उनकी समस्याएं खत्म होंगी.

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चाणक्य का हवाला देते हुए आजाद ने कहा कि फूल पर जब भौंरा बैठता है तो इस प्रकार से उसमें से रस चूस लेता है कि फूल को पता ना चले. उसी प्रकार से अगर आप टैक्स भी लगाते हैं तो कम से कम आम लोगों को उसका दर्द नहीं होना चाहिए. मान लीजिए हम खिलाफ हैं. हम मौका पाकर हमले कर रहे हैं. लेकिन जो व्यवस्था जो स्थिति व्यापारियों की, आम आदमी की है उस की व्यथा को तो दूर कीजिए. उन्होंने कहा कि मान लो कि हम बागी हैं, मान लो यशवंत सिन्हा बागी हैं, मान लो बाकी लोग जो विरोध में बोलते हैं बागी हैं. लेकिन क्या सकारात्मक आलोचना भी बागी होना होता है?

कार्ति आजाद ने कहा कि आदमी क्या सकारात्मक आलोचना नहीं कर सकता है, क्या परिस्थितियों को देखकर अगर पहले आभास कराता है तो क्या वह बागी हो गया. यह चीज आज तक मुझे समझ में नहीं आई. लोकतंत्र है और लोकतंत्र में कोई बोले तो वह बागी कैसे हो गया. यशवंत सिन्हा जी के साथ क्या हुआ नहीं हुआ मुझे उससे कोई लेना देना नहीं है. मेरा प्रश्न केवल यह है कि उन्होंने जो लेख लिखा था उसके ऊपर जवाब बिंदुवार देना चाहिए था जो नहीं दिया गया.

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क्रिकेटर से नेता बने कीर्ति ने कहा कि जवाब ना देने से मेरे मन में जो शंका थी वह विश्वास में बदल गई कि सच में अर्थव्यवस्था बहुत खराब है. अन्यथा जो अरुण जेटली ने अगले दिन दिया उससे सिन्हा के लेख का मजाक बना दिया गया. उन्होंने कहा कि यशवंत सिन्हा भी एक अच्छे अर्थशास्त्री रहे हैं, वित्त मंत्री रहे हैं और उनके जवाब में जब इस प्रकार से बोल देना ठीक नहीं है.

जेटली पर तंज कसते हुए आजाद ने कहा कि वह कभी लोक सभा चुनाव नहीं जीते, तो समझा जा सकता है कि जेटली आम जनता के दुख दर्द को नहीं समझ सकते. यह मैं समझ सकता हूं और उनको इस बात का फायदा देता हूं कि आप नहीं समझ पाएंगे क्योंकि आपने कभी चुनाव नहीं जीता और आम आदमी के बीच बैठने का मौका उन्हें नहीं मिला.

मुबंई में बाहरी लोगों वाले बयान पर कीर्ति ने राज ठाकरे को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि राज ठाकरे तो खुद बिहार का है यदि आप किताब पढ़े हैं बाला साहब ठाकरे की तो उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि मेरे जो पूर्वज बिहार से ही आए थे. वह क्या गालियां देता है सबसे पहले उस को मारकर निकालना चाहिए उसके बाद किसी और के बारे में सोचना चाहिए.

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