रांची आंदोलन के बीच छात्रों की बड़ी जीत, JPSC परीक्षा रद्द करने पर सहमत हुई हेमंत सरकार

झारखंड में JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के बीच मंत्री दीपिका पांडेय ने छात्रों से दो राउंड की बातचीत के बाद बड़े फैसलों का ऐलान किया है. 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बन गई है. TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं की जांच सीआईडी करेगी.

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14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने पर बनी सहमति. (Photo- ITG) 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने पर बनी सहमति. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • रांची,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

रांची में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के बीच झारखंड सरकार में मंत्री दीपिका पांडेय ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की सभी जायज मांगों को मानने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. छात्रों से दो राउंड की वार्ता के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनी है.

साथ ही छात्रों की जायज मांगों को मानते हुए 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बनी है. झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय ने रांची में आंदोलन कर रहे JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के साथ दो राउंड की वार्ता के बाद ये घोषणा की है.

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CID करेगी जांच TDPL परीक्षाओं की

मंत्री दीपिका पांडेय ने बताया कि छात्रों से बातचीत के बाद 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने पर सहमति बन चुकी है. इसके साथ ही टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और JSSC-CGL की जांच राज्य सरकार की एजेंसी सीआईडी (CID) से कराने का फैसला लिया गया है. इसके अलावा यदि किसी केंद्रीय एजेंसी से जांच की आवश्यकता होगी, तो राज्य सरकार ईडी (ED) को भी पत्र लिखेगी. 

90 दिनों में जांच का लक्ष्य

जेएसएससी-सीजीएल को लेकर छात्रों की चिंता का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद इसके नतीजे घोषित किए गए, नियुक्ति पत्र बांटे गए और अभ्यर्थी करीब एक साल से कार्यरत हैं. क्योंकि कोर्ट इस मामले में शामिल है, इसलिए बदली हुई परिस्थिति में राज्य सरकार क्या कदम उठाएगी, इस पर छात्रों से अपील की गई है कि सीआईडी की जांच की पूरी निगरानी न्यायिक समिति से करवाई जाएगी. 90 दिनों के अंदर इन जांचों को पूरा करके फास्ट ट्रैक कोर्ट का रुख किया जाएगा, ताकि छात्रों को न्याय दिलाया जा सके.

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झारखंड सरकार की मंत्री ने सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि ये न केवल झारखंड की समस्या है, बल्कि देश की जरूरत है कि बदलती हुई परिस्थिति के अनुसार व्यवस्था में सुधार लाए जाएं, ताकि पेपर लीक जैसी समस्या फिर से पैर न जमा सकें. 

उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड सरकार ने 2023 में ही विधानसभा से पेपर लीक के खिलाफ कठोर सजा सुनिश्चित करने वाला विधेयक पारित किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि उस वक्त बीजेपी ने राज्य में इसका विरोध किया था, लेकिन बाद में छात्रों को संतुष्ट करने के लिए संसद में उसी तरह का कानून लाया.

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