पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं करीब दोगुनी... एक दिन में 194 मामले बढ़े, कुल आंकड़ा 1007 पहुंचा

पंजाब में पराली जलाने के मामले एक हफ्ते में लगभग दोगुने होकर 1,007 पर पहुंच गए हैं. 29 अक्टूबर को एक दिन में 194 नए मामले आए. कुल मामलों में से 672 तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर के हैं, जिनमें तरनतारन में सबसे ज्यादा 397 हैं. 349 मामलों में 17 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगा और 13 लाख रुपये से ज्यादा वसूले गए. 246 एफआईआर भी दर्ज हुई हैं.

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पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले एक हफ्ते में करीब दोगुनी बढ़ोतरी हुई है (Photo: PTI) पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले एक हफ्ते में करीब दोगुनी बढ़ोतरी हुई है (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

पंजाब में पराली जलाने के मामले एक हफ्ते में लगभग दोगुने हो गए हैं. 29 अक्टूबर को एक ही दिन में 194 नए मामले सामने आए, जिसके बाद राज्य में कुल मामले बढ़कर 1,007 हो गए. इनमें से 672 मामले सिर्फ तीन जिलों तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर से हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 349 मामलों में जुर्माना लगाया गया है और 246 एफआईआर दर्ज हुई हैं.

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15 सितंबर से 23 अक्टूबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 542 घटनाएं दर्ज हुई थीं. 28 अक्टूबर तक यह संख्या 813 हो गई. फिर 29 अक्टूबर को 194 मामले और जुड़ गए और कुल आंकड़ा 1,007 पर पहुंच गया. निगरानी की सालाना अवधि 15 सितंबर से शुरू होती है, जो 1 अक्टूबर से शुरू होने वाली धान खरीद से दो हफ्ते पहले रखी गई है.

सबसे ज्यादा 397 मामले तरनतारन में आए. अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले दर्ज हुए. तरनतारन और अमृतसर में धान के कुल रकबे के 90 फीसदी से ज्यादा हिस्से की कटाई हो चुकी है.

यह भी पढ़ें: पंजाब में पराली जलाने के 717 मामले दर्ज, तरनतारन में सबसे अधिक केस, किसानों पर ₹14.95 लाख जुर्माना

पराली जलाने के 349 मामलों में पर्यावरण मुआवजे के तौर पर कुल 17 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है. इसमें से 13 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली हो चुकी है. कुल 246 एफआईआर दर्ज हुई हैं, जिनमें 165 तरनतारन और 24 अमृतसर में हैं. ये मामले भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दर्ज हुए हैं, जो सरकारी अधिकारी का आदेश न मानने से जुड़ी है.

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पिछले हफ्ते एनसीआर और आसपास के इलाकों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के चेयरपर्सन राजेश वर्मा की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय टीम ने अमृतसर और तरनतारन के उपायुक्तों और दूसरे अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में पराली के प्रबंधन और उसे जलने से रोकने की रणनीति पर बात हुई. टीम ने पराली के खेत में और खेत के बाहर इस्तेमाल और जिलों की सुविधाओं और ढांचे का जायजा लिया. दोनों जिलों के बढ़ते मामलों पर उठाए कदमों की भी समीक्षा हुई.

आयोग ने कहा कि जहां संभव हो, वहां थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्ठों और उद्योगों में पराली का ईंधन के तौर पर ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो. अधिकारियों को गांवों में नियमित जाने और किसानों तक सुविधाओं की जानकारी व जरूरी मशीनें जल्दी पहुंचाने को कहा गया. तरनतारन के उपायुक्त को इसे प्राथमिकता देने और खेत स्तर पर रोकथाम तेज करने को कहा गया.

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