प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में करोड़ों के जमीन घोटाले से जुड़े मामले में एक बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी ने तीसरी बार पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव को पत्र लिखकर कई निजी लोगों और पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है.
साथ ही ED ने हाई कोर्ट में 200 पन्नों का जवाब भी दाखिल कर दिया है, जिसमें 150 से ज्यादा पन्ने आरोपियों के बीच हुई कथित व्हाट्सएप चैट के हैं. यह पूरा मामला अब 3 सितंबर को हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.
ईडी ने 31 अगस्त को भेजे अपने पत्र में कहा है कि आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून, 2002 के तहत FIR दर्ज की जाए और इसकी कॉपी जल्द से जल्द एजेंसी को भेजी जाए. यह ताजा पत्र उस कार्रवाई के बाद आया है जब ईडी ने 7 से 10 मई के बीच अजय सहगल, नितिन गोहल और सुरेश कुमार बज्ज के ठिकानों पर तलाशी ली थी.
यह तलाशी जमीन और CLU यानी लैंड यूज बदलने से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा थी. यह पूरी जांच 348 करोड़ रुपये के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी हुई है.
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दरअसल यह पूरा मामला उस याचिका से जुड़ा है जो पिछले हफ्ते पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी. इस जनहित याचिका में पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर और संस्थागत भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं. 28 अगस्त को हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा था कि वह इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करने जा रही है. कोर्ट ने कहा था कि आरोप गंभीर हैं और सरकार को इस पर सोच समझकर जवाब देना होगा.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने ED को निर्देश दिया कि वह डीजीपी को भेजे गए पत्रों को कोर्ट के सामने पेश करे. साथ ही कोर्ट ने पंजाब के एडवोकेट जनरल से भी यह जानना चाहा कि इस मामले में राज्य पुलिस और सरकार क्या रुख अपनाने वाली है.
यह याचिका वकील निखिल सराफ ने दाखिल की है, जिसमें अधिकार के दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और सरकारी, टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं. याचिका में तबादलों के बदले पैसा, मनचाही नीतियों के बदले पैसा, टेंडर के बदले पैसा और ऐसी ही कई गैरकानूनी गतिविधियों का जिक्र है.
इससे पहले पंजाब पुलिस ने ED से कहा था कि FIR के लिए भेजे गए दस्तावेज और ट्रांसक्रिप्ट साफ तौर पर पढ़े नहीं जा सकते. इसके जवाब में ED ने 31 अगस्त के पत्र में कहा कि जरूरी जानकारी और सबूत पहले ही 30 जुलाई और 7 अगस्त के पत्रों तथा 7 अगस्त के ईमेल के जरिए पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत भेजे जा चुके हैं.
यह जानकारी पूरी जांच और सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बाद ही भेजी गई थी. ED का कहना है कि धारा 66(2) के तहत एजेंसी की सिर्फ यह जिम्मेदारी है कि वह जानकारी संबंधित एजेंसी को भेजे, इसके लिए पुलिस को अतिरिक्त पुष्टि या मूल स्रोत डेटा मांगने की जरूरत नहीं है.
ED ने अब मांग की है कि पहले से दी गई जानकारी और साफ कॉपी के आधार पर तुरंत FIR दर्ज की जाए और उसकी कॉपी 3 सितंबर की सुनवाई से पहले एजेंसी को दी जाए. ED ने यह भी कहा कि FIR दर्ज होने के बाद जांच के लिए जो भी अतिरिक्त सामग्री चाहिए होगी, वह कानून के मुताबिक दी जाएगी. एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगर FIR दर्ज करने में देरी हुई तो सबूत नष्ट या उनसे छेड़छाड़ हो सकती है, इसलिए FIR जल्द दर्ज होनी चाहिए.
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ED के दावों पर अमन अरोड़ा का पलटवार, बोले- हमारा पक्ष भी दिखाएं
पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ED की कार्रवाई और उसके दावों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि लोग सिर्फ ED के पक्ष को नहीं सुनें, बल्कि सरकार और उनका पक्ष भी सुनें.
अमन अरोड़ा ने चेतावनी दी कि जो लोग उनका या मुख्यमंत्री का पक्ष नहीं दिखाएंगे, उन्हें मानहानि का नोटिस दिया जाएगा. उन्होंने ED की कार्रवाई को “कायराना कोशिश” बताते हुए कहा कि इसका मकसद उनकी और मुख्यमंत्री की छवि खराब करना है. अमन अरोड़ा ने दावा किया कि दिल्ली में भी ED ने पहले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की थी.
कमलजीत संधू