पंजाब में लाखों सरकारी कर्मचारी गुरुवार को हड़ताल पर रहे और अपनी मांगों को लेकर राज्यभर में जोरदार प्रदर्शन किया. कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित महंगाई भत्ता (डीए) जारी करना, पुरानी पेंशन योजना बहाल करना और अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है. इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आंदोलन कर रहे कर्मचारियों से बातचीत से इनकार करते हुए कहा कि बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती.
दरअसल, कर्मचारियों ने पंजाब सिविल सचिवालय, चंडीगढ़ समेत राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किया. पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह रंधावा ने कहा कि साढ़े चार साल से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सरकार से बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भी राज्य सरकार को कर्मचारियों का महंगाई भत्ता जारी करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक कर्मचारियों का विरोध जारी रहेगा.
मुख्यमंत्री ने क्यों रोकी बातचीत?
कर्मचारी संगठनों की मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ जालंधर में बैठक तय थी. हालांकि, मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि संवाद और हड़ताल साथ-साथ नहीं हो सकते.** उन्होंने कहा कि बातचीत तभी हो सकती है, जब कर्मचारी हड़ताल वापस लें.
मुख्यमंत्री के इस रुख से कर्मचारी संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई है. अब उन्होंने आगे की रणनीति तय करने के लिए रविवार को लुधियाना में बड़ी बैठक बुलाने का फैसला किया है.
एक कर्मचारी संगठन के प्रमुख सुखचैन सिंह खैरा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके साथ बैठक नहीं की है, लेकिन कर्मचारी अपना प्रदर्शन जारी रखेंगे. उन्होंने बताया कि रविवार को लुधियाना में बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी.
लाखों कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बीच पंजाब सरकार ने भी सख्ती शुरू कर दी है. सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों से उन कर्मचारियों की सूची तैयार करने को कहा है, जो बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहे. इससे आने वाले दिनों में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने के संकेत हैं.
असीम बस्सी