पंजाब में आज से 3 लाख सरकारी कर्मचारी 'हड़ताल' पर, दफ्तरों से बस सेवाओं तक पड़ेगा असर

पंजाब में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारी 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे. कर्मचारियों के इस दो दिवसीय आंदोलन से राज्यभर में सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने की आशंका है.

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पंजाब में दो दिन सामूहिक अवकाश पर रहेंगे 3 लाख कर्मचारी (File Photo-ITG) पंजाब में दो दिन सामूहिक अवकाश पर रहेंगे 3 लाख कर्मचारी (File Photo-ITG)

असीम बस्सी

  • चंडीगढ़,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

पंजाब में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारी बुधवार और गुरुवार को सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे. कर्मचारियों के इस दो दिवसीय आंदोलन से राज्यभर में सरकारी कार्यालयों का कामकाज प्रभावित होने की आशंका है.

इसका असर चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के कामकाज पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा, पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी की बस सेवाएं भी प्रभावित होने की संभावना है.

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पंजाब सरकार के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले कई महीनों से मोर्चा खोल रखा है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है. इसी के विरोध में कर्मचारियों ने दो दिन सामूहिक आकस्मिक अवकाश लेकर प्रदर्शन करने का फैसला किया है.

संयुक्त कार्रवाई समिति ने दी आंदोलन की जानकारी

'आज तक' से बात करते हुए, सिविल सचिवालय की 'जॉइंट एक्शन कमिटी' के महासचिव साहिल शर्मा ने कहा, "लगभग 3 लाख कर्मचारी आज और कल सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जा रहे हैं. इसकी घोषणा पहले ही कर दी गई थी. आज कर्मचारी काम नहीं करेंगे और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे." दोनों दिन कर्मचारी कामकाज से दूर रहकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और अपनी मांगें उठाएंगे.

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शर्मा के मुताबिक, कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला है. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

डीए के बकाये से लेकर पुरानी पेंशन योजना तक मांगें

अपनी मांगों के बारे में विस्तार से बताते हुए, शर्मा ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार लंबित DA (महंगाई भत्ता) जारी करे, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करे, अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करे, प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन से जुड़े मुद्दों को सुलझाए, और अन्य कई मांगों को पूरा करे."

साहिल शर्मा ने कहा कि कर्मचारी चाहते हैं कि पंजाब सरकार उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार लंबित महंगाई भत्ते का भुगतान करे. उनके मुताबिक, कर्मचारियों को 18 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जाना है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान से हाल में हुई मुलाकात के बाद केवल 8 प्रतिशत डीए दिए जाने की बात सामने आई. कर्मचारी इसे अपनी मांगों के मुकाबले अपर्याप्त मान रहे हैं.

आंदोलन के तहत बुधवार को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय भवन में कर्मचारी धरना देंगे. इस दौरान वे अपनी मांगों को दोहराते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील करेंगे. सामूहिक अवकाश के कारण विभिन्न सरकारी विभागों में कामकाज की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और आम लोगों को अपने सरकारी काम निपटाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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बस सेवाओं पर भी पड़ सकता है असर

सरकारी दफ्तरों के अलावा, राज्य की सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी आंदोलन का असर पड़ने की आशंका है. कर्मचारी आंदोलन के कारण पंजाब रोडवेज और पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) की हजारों बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है. बसों में काम करने वाले संविदा चालक, परिचालक और मैकेनिक नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं. इन कर्मचारियों की हड़ताल से राज्य के प्रमुख मार्गों पर बसों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. इससे रोजाना बसों से सफर करने वाले यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है.

 

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