CM भगवंत मान ने रद्द की कर्मचारियों के साथ मीटिंग, यूनियन नेता बोले- शर्त के साथ बैठक नहीं करेंगे

पंजाब के जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और सरकारी कर्मचारियों के बीच बैठक रद्द हो गई क्योंकि मुख्यमंत्री ने शर्त रखी कि हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती. वहीं, कर्मचारी संगठनों ने सरकार की इस नीति को तानाशाही बताया है और 2027 के विधानसभा चुनावों में इसका परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है.

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कर्मचारी 27 अगस्त को CM भगवंत मान का पुतला फूंकेंगे. (Photo- ITGD) कर्मचारी 27 अगस्त को CM भगवंत मान का पुतला फूंकेंगे. (Photo- ITGD)

दविंदर कुमार

  • चंडीगढ़,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:56 PM IST

पंजाब के जालंधर में मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच होने वाली बैठक रद्द हो गई है. मुख्यमंत्री ने शर्त रखी थी कि हड़ताल और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती. 

बैठक के रद्द होने के बाद कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने जालंधर में प्रेस वार्ता की. उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि मुख्यमंत्री का ये रवैया बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के काबिल नहीं है.

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यूनियन नेताओं ने हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार बैठक के लिए बुलाते हैं और फिर शर्त रखकर पीछे हट जाते हैं. नेताओं ने कहा, 'आज मुख्यमंत्री भगोड़ा साबित हुए हैं. वो प्रपोजल तैयार करवाकर बुलाते हैं और फिर कहते हैं कि पहले हड़ताल खत्म करो.'

2027 के चुनावों में नतीजा भुगतने की चेतावनी

यूनियन नेताओं ने आगे कहा कि हम किसी शर्त के साथ बैठक नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, 'सरकार की इस दोगली नीति का नतीजा उसे 2027 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा.' कर्मचारियों ने कहा कि पंजाब में 8 लाख से ज्यादा कर्मचारी और पेंशनर प्रदर्शन कर रहे हैं. पहले ये बैठक चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में तय थी, जिसे बदलकर जालंधर किया गया. वहां पहुंचे प्रतिनिधियों को कड़ी धूप में गेट के बाहर ही रोक दिया गया.

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28 अगस्त को सीएम मान का पुतला फूंकने की तैयारी

पंजाब में 17 अगस्त से लगातार कलम छोड़ और कंप्यूटर बंद हड़ताल जारी थी. 27 अगस्त को कर्मचारी तालमेल कमेटी के आह्वान पर सामूहिक छुट्टी लेकर जालंधर प्रदर्शन में पहुंचे थे. कर्मचारी नेताओं ने ऐलान किया कि 28 अगस्त को पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री का पुतला फूंका जाएगा. इसके साथ ही 30 अगस्त को सभी संगठनों की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे के एक बड़े आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी.

यह भी पढ़ें: पेंशन, पे-स्केल, डीए... पंजाब में 7 लाख सरकारी कर्मचारी कल करेंगे हड़ताल

सरकार पर तानाशाही का आरोप

नेताओं ने कहा कि सरकार की फ्री स्कीमें और नीतियां कर्मचारी ही जमीन पर लागू करवा रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें राज्य विरोधी ठहराया जा रहा है, जबकि तानाशाही सरकार खुद कर रही है और दिल्ली से शासन चलाया जा रहा है. कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि 'रंगला पंजाब' का दावा करने वाली सरकार ने राज्य को 'कंगला पंजाब' बना दिया है और हर काम के लिए कर्ज लिया जा रहा है.

कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि आने वाले समय में युवा, किसान और बेरोजगार वर्ग एक साथ मिलकर सरकार के खिलाफ खड़े होंगे.

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