जब रात 2 बजे अरेस्ट हुए करुणानिधि, जयललिता ने लिया था अपनी गिरफ्तारी का बदला!

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबले के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इस सियासी खेल में TVK की एंट्री ताजा-ताजा है. लेकिन TVK नेता और सीएम विजय भी तमिल राजनीति की 'गिरफ्तारी पॉलिटिक्स' से बाहर नहीं निकल पाए. उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी ने राज्य की पुरानी यादें ताजा कर दी है.

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तमिलनाडु की दो हाई प्रोफाइल गिरफ्तारियां. (Photo: ITG) तमिलनाडु की दो हाई प्रोफाइल गिरफ्तारियां. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

तमिलनाडु की राजनीति में सियासत के दिग्गजों का गिरफ्तार हो जाना कोई नहीं बात नहीं है. मंगलवार को पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी तीन दशक पुरानी वो घटना याद दिला गई, जब जयललिता को जेल जाना पड़ा था. दरअसल तमिलनाडु की राजनीति में दो गिरफ्तारियां ऐसी हैं, जिनका जिक्र आज भी सत्ता और राजनीतिक प्रतिशोध की बहसों में होती है.

पहली गिरफ्तारी 1996 में तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की हुई थी, जबकि दूसरी 2001 में डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की. इन दोनों घटनाओं को एक दूसरे जोड़कर देखा जाता है. दोनों घटनाएं ऐसे समय हुईं, जब सत्ता बदल चुकी थी और नई सरकार ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई शुरू की थी.

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1996: जब जयललिता पहुंचीं जेल

मई 1996 के विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा और डीएमके के नेतृत्व में एम. करुणानिधि की सरकार बनी. नई सरकार ने जयललिता के कार्यकाल (1991-96) के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच शुरू कराई.

7 दिसंबर 1996 को जयललिता को कलर टीवी खरीद घोटाले और अन्य भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किया गया. उन पर सरकारी खरीद में अनियमितता, पद का दुरुपयोग और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे. गिरफ्तारी के बाद उन्हें चेन्नई सेंट्रल जेल भेजा गया, जहां उन्होंने करीब 27 दिन बिताए. बाद में उन्हें जमानत मिल गई. इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, टैंसी जमीन सौदा और अन्य कई मामलों की सुनवाई वर्षों तक चलती रही. 

2001: आधी रात करुणानिधि की गिरफ्तारी

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पांच साल बाद तमिलनाडु की राजनीति बदल चुकी थी. जयललिता सीएम थीं और करुणानिधि चुनाव हार चुके थे. 30 जून 2001 की आधी रात तमिलनाडु की राजनीति का सबसे विवादित घटनाक्रम सामने आया. कुछ ही सप्ताह पहले सत्ता में लौटी जे. जयललिता सरकार ने डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि को उनके चेन्नई स्थित गोपालपुरम आवास से गिरफ्तार कर लिया. 

रीडर्स डाइजेस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार रात के करीब 2 बजे करुणानिधि को चेन्नई में उनके घर से बिस्तर से खींचकर बाहर निकाला गया. 78 साल के DMK नेता को कपड़े बदलने का भी समय नहीं दिया गया. टेलीफोन लाइनें काट दी गईं और उनके घरवालों में कड़क पुलिसवालों से भर दिया गया.

वे पुलिस वाले 'अम्मा' के आदेशों का पालन करने आए थे, ये वही पुलिसवाले जो तब तक उस बुजुर्ग राजनेता के सामने सम्मान से सावधान की मुद्रा में खड़े रहते थे, जब तक वे मुख्यमंत्री थे. करुणानिधि ने अपने मोबाइल फोन से मुरासोली मारन को फोन किया. मारन तब केंद्रीय मंत्री भी थे, वे उस रात चेन्नई में ही थे. वे कुछ ही मिनटों में वे मौके पर पहुंच गए. 

 डीएमके नेता मुरासोली मारन और टी.आर. बालू ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें भी हिरासत में लिया गया. 

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करुणानिधि पर चेन्नई में फ्लाईओवर निर्माण परियोजनाओं में लगभग 12 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस और डीएमके कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई. करुणानिधि को पुलिस द्वारा घर से बाहर ले जाने का वीडियो टीवी चैनलों पर प्रसारित हुआ और पूरे देश में चर्चा का विषय बना. 

उस समय केंद्र सरकार में मंत्री रहेइस घटना पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने तमिलनाडु सरकार से जवाब मांगा था. राजनीतिक विरोधियों ने इसे बदले की कार्रवाई बताया, जबकि जयललिता सरकार का कहना था कि कानून के अनुसार कार्रवाई की गई है.

तमिलनाडु की राजनीति पर असर

1996 में जयललिता और 2001 में करुणानिधि की गिरफ्तारियां केवल कानूनी घटनाएं नहीं थीं, बल्कि डीएमके और एआईएडीएमके के बीच दशकों से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक बन गईं. आज भी राज्य की किसी बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी की चर्चा होती है तो इन दोनों घटनाओं का उदाहरण सबसे पहले दिया जाता है. 

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