लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति पर निशाना साधा. रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को राहुल ने गले लगाकर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले लगाने को ही विदेश नीति समझ लिया है. राहुल के इस तौर-तरीके पर बीजेपी नेताओं ने सवाल खड़े करते हुए जोरदार हमला बोला है.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने तो राहुल गांधी मानसिक स्थिति पर ही सवाल खड़े कर दिए. निशिकांत दूबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो और फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात के साथ तस्वीरें शेयर कर निशाना साधा.
निशिकांत दुबे से लेकर बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ,केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और गिरिराज सिंह समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है. बीजेपी की पूरी फौज राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
पहले समझ लीजिए कि मामला शुरू कैसे हुआ?
दिल्ली के मावलंकर हाल में गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में कहीं न कहीं यह बात बैठ गई है कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है. इसके बाद राहुल गांधी ने संदीप दीक्षित को गले लगाकर दिखाया कि मौजूदा सरकार के लिए आज विदेश नीति का क्या मतलब है?
राहुल गांधी ने कहा ज़रा सोचिए, कितनी अज्ञानता है. उन्हें यह विचार कहां से आया कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है. राहुल गांधी के गले लगाए जाने के बाद संदीप दीक्षित ने पूछा, 'मेलोनी समझ के तो गले नहीं लगाया था. इस पर राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन कार्यक्रम में मौजूद भीड़ जरूर ठहाके मारकर हंसने लगी. अब इसी मामले को लेकर बीजेपी आक्रामक तरीके से कांग्रेस पर हमला बोल दिया है.
राहुल गांधी को बीजेपी कैसे दे रही जवाब
बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया. इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं. निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?
साथ ही निशिकांत दुबे ने आठ साल पहले लोकसभा में राहुल गांधी के पीएम मोदी को गले लगाने वाली वायरल तस्वीर भी शेयर की और कैप्शन लिखा, 'राहुल गांधी जी, क्या इसे दम घुटने जैसा एहसास या 'गैस्ट्रिक फायर' कहते हैं, या फिर यह हवस की आग है?' बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा है. स्मृति ईरानी ने कहा कि, ऊंचाई तक पहुंच न पाए, अभद्र व्यवहार करते हैं, तर्कों से जो हार गए, मर्यादा तार-तार करते हैं.
तावड़े से लेकर बांसूरी स्वराज ने साधा निशाना
राज्यसभा सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने भी राहुल गांधी पर हमला बोला. उन्होंने एक्स पर लिखा, देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक संप्रभु देश की राष्ट्रध्यक्ष और भारतीय प्रधानमंत्री पर अशोभनीय टिप्पणियां करना बेहद अपमानजक है. भारतीय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर ऐसा आचरण भारतीय राजनीति को शर्मसार करने वाला है.
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे. वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे. गांधी की भाषा विपक्ष के नेता से अपेक्षित गरिमा के खिलाफ थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, अश्लील और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है, वह विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है.
हिमंत से लेकर प्रह्लाद जोशी ने उठाए सवाल
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए एक्स पर लिखा, 'कांग्रेस के वंशवादी नेतृत्व ने एक बार फिर शालीनता की सारी हदें पार कर दी हैं. एक मित्र देश की महिला राष्ट्राध्यक्ष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई, जबकि मंच पर और दर्शकों में मौजूद महिलाएं भी उस पर हंसती रहीं. यह केवल राजनीतिक अशिष्टता नहीं है, बल्कि भारत के विदेश संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी है. जब महिलाओं का अपमान मनोरंजन का ज़रिया बन जाए, तो इससे उस संस्कृति के बारे में बहुत कुछ पता चलता है जिसे बढ़ावा दिया जा रहा है.'
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी पीएम मोदी पर राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी में हताशा, निराशा और मायूसी साफ तौर पर देखी जा सकती है. जब परीक्षा का पेपर लीक होने और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के मुद्दों पर चर्चा की मांग उठी, तो विपक्ष भाषण सुनने के लिए भी तैयार नहीं था.
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के खिलाफ राहुल गांधी जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसे देखिए. विरोधी नेताओं की आलोचना करते समय हमेशा एक बुनियादी शिष्टाचार और सभ्य भाषा का इस्तेमाल किया जाता रहा है, चाहे वह प्रधानमंत्री हों या विपक्ष के नेता. उन्होंने उस शिष्टाचार को पूरी तरह से छोड़ दिया है क्योंकि उनमें इसकी कमी है.
aajtak.in