प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार बहुत जल्द होने जा रहा है. पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार कैबिनेट विस्तार के साथ कई मंत्रियों के विभाग में फेरबदल कर सकते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट लिख जा रही है. केंद्रीय सचिवों संग प्रधानमंत्री की बैठक को मंत्रिमंडल विस्तार के साथ छोड़कर देखा जा रहा है.
पीएम मोदी की केंद्रीय सचिवों के साथ मंगलवार को हुई बैठक में उनके विभागों का रिपोर्ट कार्ड लिए हैं ताकि पता चल सके कि किसने कितने कदम उठाए? केंद्रीय सचिवों को आगे के रोडमैप के लिए प्रधानमंत्री तैयार कर रहे हैं, जिन्हें अमलीजामा पहनाने के नई कैबिनेट बनने जा रही हैं.
मोदी कैबिनेट विस्तार की फेहरबदल होने का कारण है यह कि 9 मंत्री पद पहले खाली हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी यूपी और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. जार्ज कुरियन मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं और रवनीत सिंह बिट्टू बहुत जल्द ही कुर्सी छोड़ सकते हैं. इसके अलावा कई दलों के बागी सांसद का सियासी मिजाज बदलता है, जिसके चलते कैबिनेट विस्तार के कयास लगाए जा रहे?
मोदी कैबिनेट का कब होगा विस्तार
मानसून सत्र से पहले पांच जुलाई या फिर पीएम मोदी के 3 देशों की यात्रा से 11 जुलाई को लौटने के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है.केंद्रीय सचिवों की बैठक करते प्रधानमंत्री ने क्या यह भी तय कर लिया है कि जो जिम्मेदारी वो मंत्रिमंडल में फेरबदल करके देने वाले हैं, उससे पहले सचिवों की टीम का खाका तैयार हो जाए.
मोदी सरकार का मंत्रिमंडल अभी देखें तो प्रधानमंत्री 30 कैबिनेट मंत्री 5 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) 36 राज्यमंत्री हैं. इस तरह कुल 72 मंत्री हैं, लेकिन लोकसभा सांसदों के लिहाज से केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. इस तरह से 9 मंत्री पद अभी खाली हैं और जॉर्ज कुरियन इस्तीफा दे चुके हैं. इस लिहाज से दस मंत्री पद तो साफ साफ खाली हैं.
केंद्रीय मंत्रिमंडल के दो सदस्य पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष बन गए हैं, जिनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती हैं. इसके अलावा दो मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जार्ज कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होना है. इनमें कुरियन ने इस्तीफा दे दिया और जल्द ही रवनीत सिंह बिट्टू मंत्री पद छोड़ सकते हैं. इसके अलावा कुछ मंत्री की छुट्टी उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से हो सकती है.
कैबिनेट विस्तार में क्या बागी फैक्टर का रोल?
मोदी कैबिनेट विस्तार में में पुराने दोस्तों का कोटा बढ़ेंगे या नए समर्थक सांसदों को मिलेगी एंट्री? आम आदमी पार्टी से लेकर टीएमसी से और शिवसेना (यूबीटी) के जिन बागी सांसदों ने मोदी सरकार का समर्थन कर चुके हैं, उनमें से किसे-किसे मंत्री पद मिलेगा?
ममता बनर्जी की पार्टी के बीस बागी लोकसभा सांसद स्पीकर से मिलकर बताते हैं कि वो एनसीपीआई नाम की पार्टी में शामिल हो चुके हैं और देश के विकास में योगदान के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को समर्थन करते हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों का बीजेपी में शामिल होना और शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सदस्यों का एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में शामिल होकर सत्तापक्ष की संख्याबल में इजाफा किया है.
सहयोगी दलों को सियासी अहमियत मिलेगी
बागी सांसदों के समर्थन में आने से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की संख्याबल बढ़ गई. टीएमसी के 20 बागी सांसद के साथ आने से एनडीए के समर्थन करने वाली सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन चुकी है. टीएमसी के बागी सांसद अब नीतीश, नायडू की पार्टी से भी ज्यादा हैं, जिसमें से मोदी सरकार किसे मंत्री बनाएगी. इसके अलावा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के साथ टूटकर आए नेताओं में से किसी को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है.
उद्धव ठाकरे की पार्टी छोड़कर शिंदे वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं, जिनकी पार्टी की संसद में राजनीतिक ताकत बढ़ने पर मुहर खुद गृह मंत्री अमित शाह तक लगा चुके हैं. ऐसे में मोदी मंत्रिमंडल में क्या शिंदे के खाते में नए मंत्री पद वाली ताकत बढ़ेगी? शिवसेना शिंदे के सांसदों की संख्या अब 13 हो चुकी है, जो जेडीयू से ज्यादा सांसद हो चुके हैं. जेडीयू को अभी दो सीट एक कैबिनेट, एक राज्य मंत्री की मिली है. इसी तरह टीडीपी से दो मंत्री हैं,जिसके चलते शिंदे की पार्टी का कोटा क्या बढ़ेगा.
चुनावी राज्यों का फैक्टर का रखा जाएगा ख्याल?
मोदी मंत्रिमंडल में विस्तार-फेरबदल का दूसरा कारण अगले वर्ष सात राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव है. पंजाब और हिमाचल को छोड़कर सभी राज्य में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में चुनावी राज्यों के सियासी समीकरण को साधे रखने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में इन राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल-विस्तार की चर्चा इसलिए भी हो रही है कि मंत्रियों के लगभग दो साल के कामकाज की समीक्षा संभावित थी. इस समीक्षा के तहत मंत्री पदोन्नत या पदावनत हो सकते हैं. यूपी से अभी 10 मंत्री हैं तो हिमाचल और उत्तराखंड से एक-एक मंत्री हैं. इसके अलावा पंजाब कोटे से रवनीत सिंह बिट्टू मंत्री हैं, जिनकी जगह पर किसी नए चेहरो को लाया जा सकता है.
सामाजिक समीकरण के फैक्टर का ख्याल
सियासत में कोई भी पार्टी हो या सरकार, उसे सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को साधना होता है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार भी कैबिनेट विस्तार में अपने मंत्रियों का चयन करते समय सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के फैक्टर का खास ख्याल रखेगी. हालांकि, ऐसा करते समय योग्यता को प्रथम वरीयता दी जा सकती है,क्योंकि कोई सरकार अपने मंत्रियों के कामकाज के आधार पर ही जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में समर्थ हो सकती है.
सियासत और सरकार में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो केवल सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों में संतुलन बैठाने का काम करते हैं, जिसे मोदी सरकार के लिए अपने मंत्री कसौटी पर खरे साबित करने की है. दलित और ओबीसी की सियासत जिस तरह से विपक्ष उठा रहा, उसके लिहाज से कैबिनेट का गठन किया जा सकता है.
हिमांशु मिश्रा