केंद्रीय मंत्री मुरुगन ने दिया इस्तीफा, राज्यसभा सदस्यता भी छोड़ी, पीएम को लेटर लिख बताई 'मन की बात'

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में BJP को मजबूत करने के लिए पूरा समय देना चाहते हैं. मुरुगन ने गांव-गांव जाकर लोगों से मिलने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संगठन का विस्तार करने की इच्छा जताई है.

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प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ की. (Photo- PTI) प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में मुरुगन ने तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की तारीफ की. (Photo- PTI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:38 PM IST

मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलों के बीच केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने का भी ऐलान किया है.

मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक विस्तृत पत्र में अपनी आगे की योजना का भी जिक्र किया है. उनका कहना है कि वह अब अपना पूरा समय तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगाना चाहते हैं.

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मुरुगन ने अपने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पांच साल तक केंद्र सरकार में काम करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है. अब वह उस काम पर लौटना चाहते हैं, जिसने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया था. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में BJP को मजबूत करना और राज्य में 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को तैयार करना उनकी प्राथमिकता है.

मजदूर परिवार से केंद्रीय मंत्री तक का सफर

एल. मुरुगन ने अपने पत्र में अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते हैं. उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते थे और मवेशी भी चराते थे. उनका परिवार आज भी तमिलनाडु के कोनूर गांव में साधारण जीवन जी रहा है.

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उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने कभी कल्पना नहीं की थी कि उनका बेटा एक दिन केंद्र सरकार में मंत्री बनेगा. मुरुगन ने अपने राजनीतिक सफर का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और BJP की उस परंपरा को दिया, जिसमें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है.

मुरुगन के मुताबिक, वह कॉलेज के दिनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे. करीब तीन दशक तक ABVP और बीजेपी में काम करते हुए उनका मूल सिद्धांत रहा है- राष्ट्र पहले, पार्टी दूसरे और खुद सबसे आखिर में.

दो बार राज्यसभा सदस्य रहे मुरुगन

बता दें कि एल. मुरुगन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष के तौर पर भी काम कर चुके हैं. वह दो बार राज्यसभा के सदस्य बने और पिछले पांच वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी की मंत्रिपरिषद में शामिल रहे हैं. इस दौरान उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, संसदीय कार्य, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़े मंत्रालयों में जिम्मेदारी संभाली.

उन्होंने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी के तमिलनाडु के विकास के लिए किए गए प्रयासों की भी तारीफ की. मुरुगन ने चेन्नई मेट्रो, तूतीकोरिन बंदरगाह के विस्तार, राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 26 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों, संघर्ष वाले क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और भारतीय मछुआरों के कल्याण के मामलों में प्रधानमंत्री ने हमेशा मदद की है.

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मुरुगन ने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच रहकर संगठन को मजबूत करना चाहते हैं. उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करके BJP को राज्य में आगे बढ़ाने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करने का यह सही समय है.

गांव-गांव जाकर संगठन मजबूत करने की तैयारी

मुरुगन ने पत्र में लिखा कि वह हर गांव और हर गली में जाकर लोगों से मिलना चाहते हैं. उनका लक्ष्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहना और राज्य के हर हिस्से में BJP की मौजूदगी बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के संदेश को लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि हर परिवार विकसित भारत की यात्रा में अपनी भागीदारी महसूस कर सके.

उन्होंने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में अपनी पूरी ताकत लगाएंगे. मुरुगन ने तमिलनाडु से BJP को ज्यादा सीटें दिलाने और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पार्टी को एक और कार्यकाल दिलाने में योगदान देने की इच्छा जताई.

पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे पर जो भरोसा जताया, वह उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहेगा. अब वह जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लगातार काम करके उस भरोसे का बदला चुकाना चाहते हैं. हालांकि, मंत्री पद से मुक्त करने और राज्यसभा सदस्यता छोड़ने की अनुमति मांगना अपने आप में यह पुष्टि नहीं है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.

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