'धर्मेंद्र अगर 'यादव' होते तब भी इस्तीफा मांगते...', राजभर ने अखिलेश पर दागा सवाल, जातीय रंग में रंगने लगा इस्तीफा मामला

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में जातीय राजनीति फिर से उभर कर सामने आई है. सुभासपा प्रमुख और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सवाल दागा है.

Advertisement
अखिलेश यादव पर ओपी राजभर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सवाल उठाए हैं अखिलेश यादव पर ओपी राजभर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सवाल उठाए हैं

समर्थ श्रीवास्तव

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से जबसे धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है, सियासत पर एक बार फिर जातीय रंग चढ़ने लगा है. उत्तर प्रदेश में इसका असर अधिक दिख रहा है, जहां इसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनसे सवाल किया है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान की जाति कुर्मी की जगह यादव होती, तब भी क्या वह उनका इस्तीफा मांगते? 

Advertisement

राजभर ने जाति का मुद्दा उठाया

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'मित्र, अखिलेश यादव जी, आपसे एक प्रश्न है. अगर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जाति 'कुर्मी' की जगह 'यादव' होती, तो आपका रुख क्या होता? क्या आप इस्तीफा मांगते या उनका बचाव करते? आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी, मित्र.' इससे पहले सोशल मीडिया पर भी ऐसे दावे किए जा रहे थे कि धर्मेंद्र प्रधान को उनके कुर्मी समुदाय से होने के कारण विपक्ष, खासकर सपा और कांग्रेस, निशाना बना रहे हैं. इन पोस्ट में यह भी कहा गया कि कुर्मी समाज इस अपमान का जवाब चुनाव में देगा. अब ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद इस मुद्दे पर सियासी बहस और तेज हो गई है.

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी की लीडरशिप, सोनम वांगचुक के अनशन और जंतर-मंतर पर Gen-Z के प्रोटेस्ट के बाद बीते शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आंदोलन ने अपनी पहली बड़ी राजनीतिक जीत हासिल की. एक तंज से शुरू होकर सत्ता को हिला देने वाला यह सफर भारतीय छात्र राजनीति के इतिहास में एक मिसाल बन गया है. 'कॉकरोच' टिप्पणी से शुरू होकर प्रधान के इस्तीफे तक पहुंचे इस आंदोलन ने यह जरूर दिखा दिया कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर शुरू हुआ अभियान किस तरह सड़कों पर बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »