बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम जब सोमवार को एक्सपेंड हुई तो इसमें कई तरह के बदलाव दिखाए दिए. नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल लोगों के नाम सामने आने के बाद जहां एक ओर इसे पार्टी में बदलाव के नए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है तो वहीं इस लिस्ट को हाल ही में हुए तमाम घटनाक्रमों का असर भी बताया जा रहा है.
नितिन नवीन की टीम में जहां कुछ पुराने चेहरों पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है, वहीं लंबे समय से संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहे की नेताओं को बाहर का रास्ता भी दिखाया गया है. कुछ नेताओं का प्रमोशन हुआ है तो कुछ को पुरानी जिम्मेदारी से हटाकर नई भूमिका दी गई है. पार्टी ने युवा और अनुभवी नेताओं को एक बार फिर साथ लाकर कहीं क्षेत्रीय तो कहीं सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भी की है.
इस पूरी टीम पर एकबारगी नजर डालने पर कुछ निष्कर्ष सामने आते हैं, जिन पर गौर करना जरूरी हो जाता है-
1. उपाध्यक्षों में कौन बरकरार, किसकी छुट्टी?
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा, तारिक मंसूर और रेखा वर्मा को बरकरार रखा गया है. वहीं सरोज पांडेय, डीके अरुणा, एम. चुबा आओ, एपी अब्दुल्लाकुट्टी, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और लता उसेंडी को उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है.
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2. पुराने और चर्चित चेहरों की वापसी भी हुई
नई टीम में कुछ पुराने और चर्चित चेहरों की वापसी भी हुई है. संघ के प्रचारक रह चुके और लंबे समय तक बीजेपी संगठन में काम करने वाले राम माधव की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर वापसी हुई है. कर्नाटक के प्रोफेसर एम. नागराज और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मधुचंद्रा कर को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. एससी मोर्चा के अध्यक्ष रहे लाल सिंह आर्य को प्रमोट करके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अलावा तीरथ सिंह रावत और बिप्लब कुमार देब को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है.
3. महासचिवों में बड़ा फेरबदल
राष्ट्रीय महासचिवों में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पिछली टीम के महासचिवों में विनोद तावड़े और सुनील बंसल को ही इस पद पर बरकरार रखा गया है. अरुण सिंह, दुष्यंत गौतम, तरुण चुघ और राधामोहन दास अग्रवाल की महासचिव पद से छुट्टी हो गई है.
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4. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की भी वापसी
असम के प्रभारी और पूर्व राष्ट्रीय सचिव हरीश द्विवेदी का प्रमोशन कर उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. आदिवासी समाज से आने वाले गजेंद्र पटेल को भी महासचिव की जिम्मेदारी मिली है. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की संगठन में वापसी हुई है और उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को भी राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है.
तरुण चुघ को महासचिव पद से हटाने के बाद राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी बनाया गया है.
5. संगठन महामंत्री की व्यवस्था में भी बदलाव
शिवप्रकाश को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) के पद पर बरकरार रखा गया है. वहीं सौदान सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाकर राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी गई है. इसके साथ ही पार्टी में राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव (संगठन) के दो पद हो गए हैं.
6. सचिव पदों से हटाए गए कई बड़े नाम
राष्ट्रीय सचिवों की सूची में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है. अरविंद मेनन, पंकजा मुंडे, अलका गुर्जर, ओम प्रकाश धुर्वे, नरेंद्र सिंह, रितुराज सिन्हा, कामाख्या प्रसाद ताशा, सुरेंद्र नागर, ओम प्रकाश धनखड़ और मनजिंदर सिंह सिरसा को सचिव पद से हटाया गया है.
7. प्रोफेसर डॉ. स्वदेश सिंह को भी राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी
रितुराज सिन्हा को संगठन से पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है. उन्हें प्रकोष्ठ संकुल का सह-संयोजक बनाया गया है. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद संगीता यादव, उत्तर-पूर्व के युवा नेता मृगांक बर्मन और नागालैंड से राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है. जेएनयू में एबीवीपी से जुड़े रहे और वर्तमान में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. स्वदेश सिंह को भी राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है.
8. पीयूष गोयल की कोषाध्यक्ष के रूप में वापसी
कोषाध्यक्ष के पद पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है. राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष और नरेश बंसल को संयुक्त कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के रूप में वापसी हुई है. पीयूष गोयल पहले भी यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. खास बात यह है कि उनके पिता वेद प्रकाश गोयल भी बीजेपी के कोषाध्यक्ष रह चुके थे. पीयूष गोयल अमित शाह की टीम में केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी पार्टी के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.
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9. अमित मालवीय और संजय मयूख को जगह नहीं
नई टीम में बीजेपी आईटी सेल के संयोजक अमित मालवीय को जगह नहीं मिली है. संजय मयूख भी मीडिया सेल के सह-संयोजक पद से हट गए हैं. राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को अब मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है. नई टीम में अमित मालवीय, दुष्यंत गौतम, राधामोहन दास अग्रवाल, संजय मयूख, सरोज पांडेय, तेजस्वी सूर्या, लक्ष्मीकांत वाजपेयी और अरुण सिंह जैसे चर्चित पुराने चेहरे जगह नहीं बना पाए हैं.
10. 2029 को ध्यान में रखकर सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी ने नई टीम में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया है. पार्टी के मुताबिक करीब 40 फीसदी से ज्यादा सदस्य वंचित समाज से आते हैं. उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत को भी प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है. आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तमिलनाडु के एम. वेंकटेशन को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.
उम्र के लिहाज से भी पार्टी ने नई टीम में संतुलन साधने का दावा किया है. राष्ट्रीय टीम में 40 साल से कम उम्र के 6, 40 से 49 साल के 15 और 50 से 59 साल के 21 नेताओं को जगह दी गई है. माना जा रहा है कि संगठन में ये बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं.
नई कार्यकारिणी में संगठनात्मक अनुभव और पेशेवर विशेषज्ञता के तालमेल पर भी जोर दिया गया है. लंबे समय तक एबीवीपी से जुड़े रहे विनोद तावड़े को फिर से राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाने वाले सुनील बंसल भी इस पद पर बरकरार हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की महासचिव के रूप में वापसी हुई है, वहीं संघ के प्रचारक रहे लेखक और चिंतक राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.
पार्टी की नई टीम में राजनीतिक चेहरों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों को भी जगह मिली है. कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मधुचंद्रा कर और कर्नाटक के प्रोफेसर एम. नागराज को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जबकि जेएनयू में एबीवीपी से जुड़े रहे और वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. स्वदेश सिंह को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, टीम के गठन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री समेत वरिष्ठ नेताओं का सहयोग रहा और इसे 2029 के लोकसभा चुनाव की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
हिमांशु मिश्रा