जेल में पास्ता-चिकन मांगने वाला अमेरिकी कैदी रिहा, आतंकी ट्रेनिंग का था आरोप

राउज एवेन्यू की विशेष एनआईए अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक और 6 यूक्रेनी नागरिकों को परिवार से मिलने एक महीने के लिए विदेश जाने की इजाजत दी. अदालत ने पासपोर्ट लौटाने, 24 घंटे में संपर्क विवरण देने, जांच में शामिल होने और तय समय पर भारत लौटकर 72 घंटे में सूचना देने की शर्त भी रखी.

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अमेरिकी कैदी पर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य में आतंक फैलाने का आरोप था. (File Photo) अमेरिकी कैदी पर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य में आतंक फैलाने का आरोप था. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:54 AM IST

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल NIA कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वानडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को राहत दी है. कोर्ट ने वानडाइक को अमेरिका और छह यूक्रेनी नागरिकों को यूक्रेन जाकर अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी है. यह इजाजत एक महीने के लिए दी गई है और इसके लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं.

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NIA के विशेष जज प्रशांत शर्मा ने विदेश यात्रा की अनुमति देने वाली अर्जियां मंजूर करते हुए सभी के पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि विदेश जाने का अधिकार भारतीय संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकार का विस्तार है. सभी सात विदेशी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल भी दी गई है और गुरुवार को तिहाड़ जेल से उनकी रिहाई होने की संभावना है.

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जेल के खाने से परेशान था अमेरिकी नागरिक

मैथ्यू आरोन वानडाइक को NIA ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया था. जेल में रहने के दौरान उसने दिल्ली की अदालत में 'अमेरिकन स्टाइल डाइट' लेने और अपना खाना खुद बनाने की अनुमति मांगी थी. उसने कहा था कि वह जेल में मिलने वाले ज्यादा मसालेदार, तैलीय और डीप फ्राइड खाने को सहन नहीं कर पा रहा है.

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वानडाइक ने पास्ता, चिकन, रेड मीट, झींगा और ऑलिव ऑयल जैसे खाने की चीजों की अनुमति मांगी थी. हालांकि उसने सीधे तौर पर पिज्जा या बर्गर की मांग नहीं की थी. उसकी यह अर्जी जेल में खाने को लेकर उसकी परेशानी से जुड़ी थी.

6 यूक्रेनी नागरिकों को भी यूक्रेन जाने की अनुमति

कोर्ट ने वानडाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिकों हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होनचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर को भी यूक्रेन जाने की अनुमति दी है. सभी को अपने परिवार से मिलने के लिए एक महीने का समय दिया गया है.

कोर्ट ने आदेश दिया कि एक महीने की अवधि उनकी फ्लाइट में सवार होने के दिन से शुरू होगी. अवधि खत्म होने के बाद सभी को भारत लौटना होगा और 72 घंटे के भीतर कोर्ट को इसकी जानकारी देनी होगी. उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पता, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी NIA को देनी होगी.

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NIA की जांच में जरूरत पड़ने पर होना होगा शामिल

कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्देश दिया कि NIA जब भी जांच में शामिल होने के लिए कहे, उन्हें वीडियो कॉल या व्यक्तिगत रूप से जांच में शामिल होना होगा. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि आरोपियों ने NIA की ओर से बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने की इच्छा जताई है.

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NIA की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर राहुल त्यागी और एडवोकेट अमित रोहिला पेश हुए. NIA ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है, लेकिन फिलहाल आरोपियों की तत्काल मौजूदगी जरूरी नहीं है. वानडाइक की ओर से एडवोकेट रोहित डांडरियाल और रोहित गौर ने इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगे मामलों से डिस्चार्ज की मांग की. इसके लिए 18 सितंबर को हुई कंपाउंडिंग का हवाला दिया गया. कोर्ट ने इस आवेदन को भी मंजूर कर लिया.

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