'अमेरिका-चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं...', व्हाइट हाउस में ट्रंप से बोले राष्ट्रपति जिनपिंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की. दोनों नेताओं ने अमेरिका-चीन के बीच टकराव से बचने और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. शी ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए, यह ऐसी कुश्ती नहीं होनी चाहिए जिसमें एक की जीत दूसरे की हार हो.

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि वह ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं (Photo- Reuters) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि वह ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:43 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में मुलाकात की. एक दशक से ज्यादा समय बाद वॉशिंगटन पहुंचे शी जिनपिंग का ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने औपचारिक स्वागत किया. दोनों नेताओं ने अपनी शुरुआती टिप्पणी में अमेरिका-चीन रिश्तों को बेहतर बनाने और दोनों देशों के बीच टकराव से बचने पर जोर दिया. 

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इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), व्यापार, तकनीक, ताइवान और दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. ट्रंप ने कहा कि जिस तरह अमेरिका और चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मिलकर काम किया था, उसी तरह अब दोनों देश बेहतर भविष्य बनाने के लिए साथ काम कर सकते हैं. उन्होंने शी जिनपिंग के साथ अपने रिश्ते को बेहद अच्छी दोस्ती बताया और कहा कि यह रिश्ता 2016 में उनके पहली बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से बना है.

शी जिनपिंग ने कहा कि वह ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका आए हैं ताकि दोनों देशों की दोस्ती को आगे बढ़ाया जा सके, सहयोग बढ़ाया जा सके और दोनों देशों के लोगों की भलाई सुनिश्चित की जा सके.

शी बोले- अमेरिका-चीन में रेस हो, रेसलिंग नहीं

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शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि दोनों देश सहयोग से फायदा उठा सकते हैं, जबकि टकराव दोनों के लिए नुकसानदेह होगा. अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा को खत्म करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह स्वस्थ होनी चाहिए और इसकी एक सीमा तय होनी चाहिए. अमेरिका चीन के बीच रेस हो, रेसलिंग नहीं. उन्होंने इसे एक-दूसरे से आगे निकलने की रेस बताया, न कि ऐसी रेसलिंग जिसमें एक की जीत दूसरे की हार पर निर्भर हो.

चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच संभावित टकराव को लेकर 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' का भी जिक्र किया. यह उस सिद्धांत को कहा जाता है जिसमें किसी उभरती ताकत और मौजूदा बड़ी ताकत के बीच बढ़ता तनाव युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है. शी ने कहा कि चीन और अमेरिका को संघर्ष और टकराव से बचने की कोशिश करनी चाहिए और दोनों देश इस स्थिति से निकलने का रास्ता खोज सकते हैं.

उन्होंने दोनों देशों की सेनाओं के बीच नियमित बातचीत बढ़ाने और संकट के समय संवाद के बेहतर इंतजाम करने की भी बात कही.

AI इंसानों के नियंत्रण में रहे: शी

शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी अपनी शुरुआती टिप्पणी में प्रमुखता दी. उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका AI के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देश हैं और इसलिए दोनों की जिम्मेदारी है कि इसका विकास सही दिशा में हो.

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शी ने कहा कि दोनों देशों के पास AI को अच्छे कामों के लिए विकसित और मैनेज करने की क्षमता और जिम्मेदारी है. उन्होंने जोर दिया कि AI का विकास हमेशा इंसानों के नियंत्रण में रहना चाहिए और इसका इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए होना चाहिए.

AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है. दोनों देश एडवांस्ड चिप्स, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और AI तकनीक में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों देशों के वित्त मंत्रियों की हालिया बैठक में AI से जुड़ी घटनाओं को लेकर आपसी सूचना साझा करने की एक नई व्यवस्था पर भी चर्चा हुई थी.

ट्रंप बोले- 'सुपर इंटेलिजेंस' पर होगी बात

ट्रंप ने AI को 'सुपर इंटेलिजेंस' बताते हुए कहा है कि यह उनकी और शी की बातचीत का एक बड़ा मुद्दा होगा. उन्होंने कहा कि सुरक्षा और तकनीक से जुड़े फैसले आने वाले दशकों में शांति और समृद्धि पर असर डाल सकते हैं.

दोनों देशों के बीच AI को लेकर बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब AI की तेजी से बढ़ती क्षमता को लेकर सुरक्षा और नियंत्रण से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं. अमेरिका और चीन के बीच इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ AI से जुड़े जोखिमों को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है.

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ट्रेड वॉर के बीच ट्रंप-शी की मुलाकात

ट्रंप और शी की बैठक से पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया कि दोनों देश ट्रेड वॉर को रोकने वाली मौजूदा व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं. यह समझौता पिछले साल दक्षिण कोरिया में ट्रंप और शी की मुलाकात के बाद बना था.

पिछले साल अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के दौरान अमेरिकी टैरिफ की अधिकतम दर 145 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. चीन ने भी जवाब में अमेरिकी सामान पर 125 प्रतिशत तक शुल्क लगाया था. बाद में दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद औसत अमेरिकी टैरिफ दर करीब 47 प्रतिशत और चीन की दर करीब 30 प्रतिशत के मध्य तक आ गई थी.

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