यूपी में नारायणी नदी तो बिहार में गंडक का कहर जारी, जानिए बाढ़ की चपेट में कौन-कौन जिले

देश के कई राज्यों में मौसम ने करवट बदल ली है और लगातार बारिश से लोग बाढ़ का सामना कर रहे हैं. यूपी-बिहार में तेज बारिश की वजह से नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. कुशीनगर में नारायणी, तो बिहार में गंडक ने मुश्किलें बढ़ाई हैं. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई गांवों में लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हैं.

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 नेपाल में जलस्तर बढ़ने से यूपी-बिहार में भी मुसीबत बढ़ी है (Photo-ITG) नेपाल में जलस्तर बढ़ने से यूपी-बिहार में भी मुसीबत बढ़ी है (Photo-ITG)

समर्थ श्रीवास्तव / शशि भूषण कुमार

  • लखनऊ, पटना,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:07 PM IST

कई दिनों से लगातार भारी बारिश के बाद यूपी में नारायणी नदी अचानक उफान पर आ गई. कुशीनगर में पानी के तेज दबाव के बीच तटबंध टूटने से कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया और लोगों को रातों-रात अपना घर छोड़ना पड़ा. वहीं बिहार के जिलों में भी लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं.

कुशीनगर के जवाही दयाल और बिरवट कोनवलिया के बीच गौरहा गांव में तटबंध टूट गया था. नारायणी नदी में आमतौर पर 3 से 4 लाख क्यूसेक पानी रहता है, लेकिन नेपाल से अचानक करीब 5.5 लाख क्यूसेक पानी आने से तटबंध पर दबाव बढ़ गया. तटबंध टूटने के बाद 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों को खाली कराया गया.

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प्रशासन ने आशंका जताई है कि जल्द हालात नहीं संभले तो 50 से ज्यादा गांवों पर इसका असर पड़ सकता है. हालात को देखते हुए NDRF, SDRF और PAC की टीमें मौके पर तैनात हैं. बचाव के साथ ही जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री बांटी जा रही है. 

कुशीनगर में जलस्तर बढ़ने पर घर छोड़ने को मजबूर हुए लोग

आजतक की टीम जब मौके पर पहुंची तो सड़क किनारे कई परिवार मदद का इंतजार करते दिखे. पानी लगातार बढ़ रहा था. लोग घरों से जितना सामान बचा सके, उसे लेकर सुरक्षित जगहों की तरफ निकल रहे थे. बाढ़ पीड़ित अनारकली ने कहा, 'सब कुछ तबाह हो गया है, जो बच पाया है ले आए हैं.'


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात का जायजा लिया और मामले का संज्ञान लेकर अधिकारियों से बात की. बाद में उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया. प्रशासन के मुताबिक 5 हजार सूखे राहत पैकेट और खाद्य सामग्री बांटी गई है. प्रभावित परिवारों को 50 किलो खाद्य सामग्री दी जा रही है.

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सरकार ने बताया कि हर पीड़ित को सहायता मिलेगी. जनहानि होने पर 4 लाख रुपये की तत्काल मदद और घर क्षतिग्रस्त होने पर PM/CM आवास योजना के तहत नया घर देने की बात कही गई है.

यह भी पढ़ें: CM योगी ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा, पीड़ितों से मिले और राहत सामग्री भी बांटी

इसके साथ ही मुरादाबाद में भी राम गंगा और कोसी नदी का पानी बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात हैं. रास्तों पर जलभराव होने से लोगों को आवाजाही ठप हो गई है. वहीं प्रयागराज में कई दिनों की भारी बारिश और आस-पास के राज्यों में आई बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है. गंगा-यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है. 

बिहार में गंडक से 6 जिले प्रभावित

बिहार में भी नेपाल से आए पानी ने मुश्किलें बढ़ाई हैं. गंडक के तेज बहाव और दबाव से चंपारण में चार जगह तटबंध टूटे हैं. राज्य के 6 जिले बाढ़ की स्थिति में हैं और करीब 1.59 लाख आबादी प्रभावित हुई है. 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक में 5.43 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. इससे चंपारण में बड़े स्तर पर पानी बढ़ा है. 

चंपारण में चार जगह टूटे तटबंध

पश्चिम चंपारण में बगहा के खैरटवा गांव में करीब 200 फीट, बैरिया में फुलियाखांडा गांव के पास करीब 200 फीट और बथुवारिया में शिव मंदिर के पास करीब 15 फीट तटबंध टूटा. पूर्वी चंपारण के अरेराज में लोकनाथपुर पांडे टोला के पास करीब 20 फीट रिंग बांध टूट गया. अरेराज के सरैया पंचायत में पांडे टोला के पास मनरेगा से बना रिंग बांध भी पानी के दबाव में टूट गया.

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अचानक तटबंध टूटने से  एक दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हुए और सैकड़ों एकड़ फसल पर असर पड़ा. ग्रामीणों का आरोप है कि पहले ही रिसाव की सूचना दी गई थी, इसके बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई. मिसरौलिया पंचायत के सिकटिया में भी पुराना बांध टूट गया. ऐसे में ग्रामीण पेड़ काटकर और मिट्टी डालकर उसे बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज रिसाव के बाद हालात बेकाबू हो गए. 

गोपालगंज में घरों तक घुसा पानी

गंडक का पानी बढ़ने से गोपालगंज में कई घर, स्कूल, अस्पताल और सड़कें पानी में डूब गए. लोग छतों और सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं. राशन, पशुओं का चारा और जरूरी सामान नाव से पहुंचाया जा रहा है. मांझा प्रखंड की गौसिया पंचायत के वार्ड 13 और 14 में कई घरों में कमर तक पानी है.

मुखिया राधा रमन मिश्रा के मुताबिक दोनों वार्डों में हालात बेहद खराब हैं. लोगों के पास न खाना बनाने की जगह बची है और न मवेशियों को बांधने की. इलाके में पानी का बहाव इतना तेज है कि लोगों से बात करते हुए जमीन का एक बड़ा हिस्सा पानी में हर गया , जिससे एक बड़ा खतरनाक गड्ढा बन गया.  

लोग पेट भरने के लिए चूड़ा खाकर गुजारा कर रहे हैं. वहीं निमुइया पंचायत में नाव नहीं मिलने से एक व्यक्ति का शव भी पड़ा होने की बात सामने आई है. स्थानीय लोगों ने प्रभावित इलाकों में तुरंत नाव भेजने की मांग की है.

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