UGC पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा- हर छात्र की रक्षा करें, केंद्र बनाएगी कमेटी

यूजीसी के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा कि इन पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाने जा रही है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करना चाहती है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नए नियमों के तहत किसी भी वर्ग के छात्र को ऐसा महसूस न हो कि उसे बाहर रखा जा रहा है या उसके साथ भेदभाव हो रहा है. 

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UGC के नियमों पर विचार करने के लिए सरकार कमेटी बनाएगी. (फाइल फोटो-ITG) UGC के नियमों पर विचार करने के लिए सरकार कमेटी बनाएगी. (फाइल फोटो-ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:50 PM IST

केंद्र सरकार यूजीसी के नए नियमों की समीक्षा करेगी. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के नए नियमों पर दोबारा विचार करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाने जा रही है. ये नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव रोकने से जुड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जनवरी में इन नियमों पर रोक लगा दी थी. 

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इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करना चाहती है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नए नियमों के तहत किसी भी वर्ग के छात्र को ऐसा महसूस न हो कि उसे बाहर रखा जा रहा है या उसके साथ भेदभाव हो रहा है. 

कोर्ट के अनुसार इस कमेटी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस व्यवस्था के तहत कोई भी समूह खुद को अलग-थलग, असुरक्षित या आशंकित महसूस न करे.

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि नियम बनाते समय सभी छात्रों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है. युवा पीढ़ी की चिंताएं और उनका कल्याण सबसे अहम होना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में नए नियमों के कुछ प्रावधानों को पहली नजर में अस्पष्ट बताते हुए उनके दुरुपयोग की आशंका जताई थी. कोर्ट ने फिलहाल 2012 के पुराने UGC नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया था. 

CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर छात्र का ख्याल रखा जाए. आने वाली युवा पीढ़ी का भी ध्यान रखा जाए.हम चाहते हैं कि इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए जाएं. 

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि, "आप इन नियमों पर फिर से विचार क्यों नहीं करते ताकि अगली पीढ़ी का ध्यान रखा जा सके? उन्हें हर छात्र के हित की रक्षा करनी चाहिए."

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता में कोर्ट को यह बताया कि हम सभी मुद्दों पर गौर करने के लिए एक समिति बना रहे हैं.

दरअसल उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए UGC द्वारा बनाए गए नए नियम को दी गई चुनौती पर पिछली सुनवाई के दौरान यूजीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि UGC नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है. 

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियम पर अंतरिम रोक लगाते हुए केन्द्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया था. 

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यूजीसी के नए नियमों में विवाद की वजह क्या है?

UGC के नए नियमों पर विवाद की मुख्य वजह जातिगत भेदभाव की परिभाषा और शिकायतों के दुरुपयोग की आशंका है. UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए नए नियम अधिसूचित किए थे. इनका मकसद SC, ST और OBC छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकना था.

विवाद नियम 3(1)(c) को लेकर शुरू हुआ. इसमें जातिगत भेदभाव की परिभाषा के तहत SC, ST और OBC छात्रों को शामिल किया गया, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को इसमें जगह नहीं दी गई. विरोध करने वालों का कहना है कि इससे सामान्य वर्ग के छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायतों के मामले में खुद को असुरक्षित महसूस कर सकते हैं. उनका यह भी सवाल है कि झूठी शिकायतों से निपटने का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं रखा गया.

दूसरी ओर इन नियमों के समर्थकों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में वंचित समुदायों के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है. 

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नियमों पर रोक लगाते हुए इनके कुछ प्रावधानों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताया. फिलहाल 2012 के नियम लागू हैं. 

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