NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में युवाओं ने प्रोटेस्ट किया. कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र संगठनों के पुरजोर विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि इस बात को 1 हफ्ते हो गए हैं, लेकिन प्रोटेस्ट पर अभी भी सियासत में गहमागहमी है.
इस पूरे मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता स्मृति इरानी ने सरकार का बचाव किया है. उन्होंने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है कि पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शनों ने देश के युवाओं यानी Gen-Z और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच की दूरी को बढ़ा दिया है.
इंडिया टुडे के एक इंटरव्यू में स्मृति इरानी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले पर बहुत तेजी से काम किया है. उन्होंने संसद से पास हुए कड़े एंटी-पेपर लीक कानून, एक्सपर्ट्स की टास्क फोर्स के गठन और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया के जरिए छात्रों से सीधे संवाद का हवाला दिया. इरानी के मुताबिक, ये कदम दिखाते हैं कि सरकार युवाओं की चिंताओं को लेकर बेहद गंभीर और संवेदनशील है.
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'युवाओं को एक ही चश्मे से देखना गलत'
जब स्मृति इरानी से पूछा गया कि क्या छात्रों का यह गुस्सा सरकार और नई पीढ़ी के बीच बढ़ते फासले का नतीजा है, तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय सेना, पुलिस और दूसरे सरकारी संस्थानों में रहकर देश की सेवा कर रहा है. इसलिए केवल उम्र के आधार पर सभी युवाओं को एक ही श्रेणी में खड़ा करना, उन्हें सरकार विरोधी बताना बिल्कुल गलत है. उन्होंने अपील की है कि उम्र को देश में किसी नए बंटवारे का जरिया न बनाया जाए, क्योंकि देशभक्ति और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान हर पीढ़ी के लिए एक समान है.
प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री ने एक बेहद अहम बात कही. उन्होंने कहा, 'आपको अपनी बात रखने, बहस करने और असहमति जताने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, लेकिन आपको अराजकता फैलाने या हिंसा करने का कोई हक नहीं है.'
इरानी ने सवाल उठाया कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा केवल प्रदर्शन कर रहे छात्रों की बात कर रहा है, लेकिन आंदोलनों के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों की दिक्कतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उन्होंने खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए यह भी आशंका जताई कि छात्रों के इन मासूम प्रदर्शनों में कुछ आपराधिक तत्वों ने भी घुसपैठ कर ली थी. इसका मकसद माहौल को खराब करना था.
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर स्मृति इरानी ने दी सफाई
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा मोड़ तब आया था जब चौतरफा दबाव के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. विपक्षी दलों और छात्र संगठनों जैसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' और अन्य डिजिटल आंदोलनों के कड़े विरोध के बाद हुए इस इस्तीफे को लेकर स्मृति इरानी ने सरकार का बचाव किया.
उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का पद छोड़ना सरकार की संवेदनशीलता को दिखाता है. उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि छात्रों के इस आंदोलन का फायदा उठाकर आपराधिक ताकतें देश में कानून-व्यवस्था को नुकसान न पहुंचा सकें,
अपनी पुरानी यादों को शेयर करते हुए स्मृति इरानी ने कहा कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी चुनौतियां कोई आज की नहीं हैं, ये सालों से चली आ रही हैं. लेकिन मोदी सरकार ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी बनाने के लिए देश के इतिहास का सबसे बड़ा परामर्श अभियान चलाया था. इसमें 2.25 लाख से ज्यादा ग्राम शिक्षा समितियों और अभिभावकों से राय ली गई थी. उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार के बनाया गए नया कड़ा कानून और जांच कमेटियां जल्द ही इस समस्या को जड़ से खत्म कर देंगी.
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