त्योहार पर दोहरी मार, महंगी हुई चीनी... Zepto और Blinkit पर 2 किलो से ज्यादा खरीदने पर रोक

त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे ग्राहकों को दोहरी परेशानी हो रही है. जेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने चीनी की खरीद पर सीमा तय कर दी है. डीमार्ट और रिलायंस जैसे ऑफलाइन स्टोर्स ने भी ग्राहकों के लिए 2 से 3 किलो की सीमा लगाई है.

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चीनी की किल्लत से जूझ रहे ग्राहक (Photo: Getty) चीनी की किल्लत से जूझ रहे ग्राहक (Photo: Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:24 PM IST

त्योहारी सीजन नजदीक आते ही चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. मिठाई, हलवा और तमाम पारंपरिक पकवान बनाने के लिए हर घर में चीनी की मांग बढ़ने वाली है, लेकिन इस बार ग्राहकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. एक तरफ चीनी महंगी हो गई है, दूसरी तरफ इसे खरीदने की मात्रा भी सीमित कर दी गई है. जेप्टो, ब्लिंकिट और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स ऐप पर चीनी के पैकेट तय संख्या में ही ऑर्डर किए जा सकते हैं.

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इंडिया टुडे डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि इन प्लेटफॉर्म्स पर चीनी के कुछ प्रोडक्ट्स पर खरीद की सीमा लगाई गई है. जेप्टो पर कई चीनी प्रोडक्ट्स की उपलब्धता सीमित बताई जा रही है और पैकेट की संख्या पर भी रोक है. ब्लिंकिट पर भी कुछ चीनी पैकेट्स पर खरीद की सीमा दिखाई दे रही है. स्विगी इंस्टामार्ट पर सुप्रीम हार्वेस्ट क्रिस्टल शुगर के एक लिस्टिंग में एक ऑर्डर पर सिर्फ दो किलो के दो पैकेट ही खरीदे जा सकते हैं.

यह पाबंदी सिर्फ ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार डीमार्ट और रिलायंस जैसे बड़े ऑफलाइन स्टोर्स ने भी कुछ शहरों में ग्राहकों के लिए चीनी खरीद की सीमा 2 से 3 किलो तय कर दी है. यानी ग्राहक चाहे ऑनलाइन ऑर्डर करें या दुकान जाकर खरीदें, दोनों जगह उन्हें सीमित मात्रा में ही चीनी मिल पाएगी.

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चीनी की कीमतें अचानक क्यों बढ़ीं, इसे लेकर सरकार ने भी कदम उठाए हैं. सरकार ने कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. पहले 20 अगस्त की अधिसूचना के तहत आयातकों को टैरिफ रेट कोटा के जरिए बिना ड्यूटी दस लाख टन कच्ची चीनी आयात करने और उसे 31 अक्टूबर 2026 तक रिफाइन करके बेचने की छूट दी गई थी. अब सरकार ने यह समयसीमा बढ़ा दी है. नए नियम के तहत आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने का समय मिलेगा ताकि वे कच्ची चीनी को रिफाइन करके घरेलू बाजार में बेच सकें.

सरकार की यह कोशिश बाजार में जल्दी ज्यादा चीनी पहुंचाने और जमाखोरी रोकने की है, लेकिन आयातित चीनी को बाजार तक पहुंचने में अभी समय लगेगा. तब तक दुकानदार खुद ही ग्राहकों को मिलने वाली मात्रा को नियंत्रित कर रहे हैं. सामान्य घरेलू इस्तेमाल के लिए एक दो पैकेट खरीदने वालों को शायद फर्क न पड़े, लेकिन त्योहार के लिए बड़ी मात्रा में चीनी खरीदने वाले परिवारों को यह पाबंदी जरूर महसूस होगी. अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार के कदमों का असर बाजार में कीमतों और उपलब्धता पर कब तक दिखेगा.

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