पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपनी हिरासत के एक साल बाद लेह में हुई फायरिंग को लेकर न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और मृतकों के परिवारों को ज्यादा मुआवजा देने की मांग की है. वांगचुक ने रविवार को जारी बयान में अपनी करीब छह महीने की हिरासत और लद्दाख के लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर भी सवाल उठाए.
वांगचुक ने कहा कि उन्हें 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर लद्दाख से करीब काफी दूर जोधपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया था. उन्होंने दावा किया कि वहां करीब छह महीने तक उन्हें ज्यादातर समय अलग रखा गया. बाद में 14 मार्च 2026 को सरकार ने उनका हिरासत आदेश रद्द कर दिया था.
वांगचुक ने किया एक साल पहले की घटनाओं का जिक्र
वांगचुक ने 24 सितंबर 2025 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस फायरिंग में चार युवाओं की जान गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे. उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग बनाया गया था, लेकिन करीब एक साल बाद भी इसकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है.
उन्होंने सवाल किया कि फायरिंग का आदेश किसने दिया, क्या गोली चलाने से पहले भीड़ को कंट्रोल करने के दूसरे सभी उपाय अपनाए गए थे और लोगों को शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में गोलियां क्यों लगीं. वांगचुक ने मांग की कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और अगर किसी की गलती सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए.
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मृतकों के लिए अधिक मुआवजे की मांग
उन्होंने मृतकों के परिजनों को दिए गए 15 लाख रुपये के मुआवजे को भी नाकाफी बताया. वांगचुक ने कहा कि किसी व्यक्ति की जिंदगी की भरपाई पैसे से नहीं हो सकती, लेकिन मुआवजा पीड़ित परिवार के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को दिखाता है. उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा बढ़ाने और गंभीर रूप से घायल लोगों को उनकी चोट के अनुसार आर्थिक सहायता देने की मांग की.
वांगचुक ने सितंबर 2025 की घटनाओं के बाद दर्ज आपराधिक मामलों का मुद्दा भी उठाया. उनके मुताबिक 87 लोगों को आरोपी बनाया गया और 81 गिरफ्तार हुए थे. प्रशासन ने 20 लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने की मंजूरी दी है. उन्होंने बाकी मामलों की भी समीक्षा करने की मांग करते हुए कहा कि हिंसा के विश्वसनीय सबूत मिलने पर कानून अपना काम करे, लेकिन निर्दोष लोगों को कानून का संरक्षण भी मिलना चाहिए.
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