चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट के बाद विपक्ष सीईसी ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में करीब 14 बार गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की और सीईसी पर जमकर हमले किए. उन्होंने सीईसी को देशद्रोही तक करार दिया और इस्तीफे की मांग की.
राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी लोकतंत्र को कमजोर करती है. जहां तानाशाही वहां एंटी-इनकंबेंसी नहीं. देश के संविधान को नष्ट किया जा रहा है. कानून चोरी से संस्था चोरी हो रही है. चुनाव आयोग वोट का संरक्षक है. वोट की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है. अगर वोट ही खत्म हो जाए तो संविधान, कानून और संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता.
उन्होंने कहा कि मैं हवा में बातें नहीं कर रहा हूं. मैंने इसे सबूत के साथ दिखाया है. मैं आपको बता दूं इस बात को 100 फीसदी पक्का करने के लिए पहले से ही बहुत सारी जानकारी मौजूद है. 99% नहीं, बल्कि 100% पक्का कि हमारे चुनावों में धांधली हो रही है.
राहुल गांधी ने सीईसी ज्ञानेश पर तीखा हमला किया और कहा कि उस लिस्ट में सबसे ऊपर जो लोग हैं जिन्हें हम साजिशकर्ता कहते हैं, मिस्टर ज्ञानेश कुमार वहीं बैठे हैं. दो चुनाव आयुक्त उस व्यक्ति पर सवाल उठा रहे हैं. मैं भी सवाल उठाता रहा हूं. उन सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया लेकिन देश के लोगों ने विश्वास किया. हालांकि, देश चलाने वालों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी.
उन्होंने कहा कि लेकिन अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार ही हमारी वोटिंग प्रणाली को हुए नुकसान और इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं.
कांग्रेस सांसद ने कहा, हमारी मांग है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें. उन्होंने जो किया है, वह असल में देश के हित के खिलाफ है. हमारे पास भी बहुत सारी जानकारी है. जल्द ही इसके नतीजे सामने आएंगे. दोनों चुनाव आयुक्तों ने सच सामने लाकर सही काम किया है. मैं सच में इसकी तारीफ करता हूं.
राहुल गांधी ने कहा कि आज वोटिंग सिस्टम और कानून बनाने की प्रक्रिया खत्म हो गई है. मतलब, अगर वोट चोरी हुए हैं और संसद में बैठे सांसद चोरी हुए वोटों के आधार पर वहां पहुंचे हैं तो उनके बनाए सभी कानून गैर-कानूनी हैं. मुझे पूरा यकीन है कि अगले 6 महीने में ये सब आपके सामने साफ-साफ आ जाएगा क्योंकि जानकारी पहले से ही मौजूद है.
राहुल गांधी ने कहा कि मैं घटनाक्रम के बारे में थोड़ा बताना चाहूंगा क्योंकि इसमें कुछ दिलचस्प बातें हैं. 21 दिसंबर 2023 को एक अजीब कानून पास किया गया, जिससे चुनाव आयुक्त जांच के दायरे से बाहर हो गए. उनके खिलाफ कोई जांच नहीं हो सकती. वे कानूनी व्यवस्था के दायरे से बाहर हैं.
इसके बाद 7 फरवरी को हमने महाराष्ट्र के मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हमने साफ तौर पर बताया कि क्या चल रहा है और सबूत भी पेश किए. उसके बाद मैंने प्रधानमंत्री को एक असहमति नोट दिया. हालांकि, मेरी राय को नजरअंदाज कर दिया गया. फिर उस व्यक्ति की नियुक्ति प्रधानमंत्री द्वारा की गई.
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