'बड़ी गलती कर दी, प्रयागराज नहीं... रांची जाना चाहिए था', किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर कटाक्ष

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रयागराज की बजाय रांची जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि बड़ी गलती कर दी है.

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राहुल गांधी शनिवार (8 अगस्त) को प्रयागराज पहुंचे थे.(Photo: ITG) राहुल गांधी शनिवार (8 अगस्त) को प्रयागराज पहुंचे थे.(Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:56 AM IST

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रयागराज जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने निशाना साधा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी को प्रयागराज की बजाय रांची जाना चाहिए था. रिजिजू ने रविवार कहा 'बड़ी गलती कर दी है, लेकिन गलतियां इंसान से होती हैं.'

इससे पहले राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच शनिवार को महिला आरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली थी. दोनों के बीच बहस महिला आरक्षण विधेयक को प्रस्तावित परिसीमन से जोड़ने को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच हुई.

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बहस की शुरुआत तब हुई जब रिजिजू ने महिलाओं की अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर राहुल गांधी के एक वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उनसे महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने को कहा. इसके जवाब में राहुल गांधी ने सवाल किया कि महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने की जरूरत क्यों है.

राहुल गांधी शनिवार (8 अगस्त) को प्रयागराज पहुंचे थे. उन्होंने यहां आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उसकी नीतियों की वजह से देश का युवा आज बेहाल है.

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वे मुख्य रूप से तीन चीजों पर बात करना चाहते हैं. दर्द, डेटा और दौलत. उन्होंने बताया कि वे युवाओं के दर्द और उनके द्वारा पैदा किए जाने वाले डेटा की बात कर रहे हैं, लेकिन आज असल समस्या यह है कि जो धन या दौलत युवाओं की होनी चाहिए, वह केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण उनके पास नहीं पहुंच रही है.

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प्रयागराज के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं के सामने आ रहे गंभीर संकटों पर भी बात की. उन्होंने युवाओं से कहा कि आज इंस्टाग्राम और फेसबुक रील्स देखना एक नए तरह का 'इक्कीसवीं सदी का नशा' बन चुका है. पढ़ाई और लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब युवाओं को नौकरी नहीं मिलती, तो उन्हें मजबूरी में ब्लिंकिट और उबर जैसी कंपनियों में दस-दस घंटे दिहाड़ी मजदूरों की तरह काम करना पड़ता है.

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