देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है. चारों तरफ तिरंगा शान से लहरा रहा है. इस बीच लाल किले पर हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल नहीं हुए. दोनों नेताओं की ओर से समारोह में बैठने की व्यवस्था और तय प्रोटोकॉल को लेकर नाराजगी जताई गई.
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की नाराजगी समारोह में प्रोटोकॉल और सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर थी. लाइनअप से लेकर बैठने की जगह तक कई चीजें उनके पद के मुताबिक तय नहीं थीं. इसी वजह से दोनों नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बना ली, जिसके बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गईं.
साल 2024 में भी स्वतंत्रता दिवस पर इसी तरह का बड़ा विवाद हुआ था. उस समय लोकसभा में नेता विपक्ष को पहली कतार के बजाय पीछे की कतार में बैठाया गया था. विपक्ष ने इसे जनता का अपमान बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय का कहना था कि ओलंपिक खिलाड़ियों को जगह देने के लिए यह बदलाव किया गया था. नियम के मुताबिक, ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में नेता विपक्ष के लिए पहली कतार में सीट तय होती है.
हाल ही में खत्म हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान काफी बढ़ गई थी. पूरे सत्र में अलग-अलग मुद्दों पर लगातार हंगामा देखने को मिला. सदन की कार्यवाही बाधित होने पर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया.
लाल किले पर पीएम मोदी ने फहराया तिरंगा
देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. इस मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया. इससे पहले उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं. पीएम मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की ताकत से देश अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है. आने वाले समय में विकास की यह रफ्तार और तेज होगी.
विकास से सुरक्षा तक कई मुद्दों पर बोले पीएम मोदी
लाल किले से अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश के विकास, युवाओं के भविष्य, सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर बात की. उन्होंने 'दिमागी नक्सलियों' का भी जिक्र किया.
पीएम मोदी ने कहा कि बंदूक उठाने वाले नक्सली खत्म होने की कगार पर हैं, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अब भी मौके की तलाश में हैं. उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत बताई. साथ ही उन्हें अलग-थलग करने की बात कही.
संसद के मॉनसून सत्र के बाद से ही दोनों खेमों में तनातनी चल रही थी. अब स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यक्रम में न पहुंचना साफ बताता है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की सियासी दूरी फिलहाल कम होने वाली नहीं है.
राहुल गौतम