देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक तिरंगा शान से लहरा रहा है. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया. उन्होंने विकास, युवाओं के भविष्य से लेकर देश की सुरक्षा तक कई मुद्दों पर बात की. इसी दौरान उन्होंने अराजकता फैलाने की कोशिश करने वाले 'दिमागी नक्सलियों' पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बंदूक वाले नक्सली खत्म होने की कगार पर हैं, लेकिन 'दिमागी नक्सल' अब भी मौके की तलाश में हैं. इन्हें पहचानना होगा, अलग-थलग करना होगा.
लाल किले से बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद ने लंबे समय तक देश के बड़े हिस्से को जकड़ कर रखा था. इस हिंसा ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और अनगिनत परिवारों ने अपने बेटों को खोया. साल 2014 में सरकार बनने के बाद नक्सलवाद को खत्म करने का जो संकल्प लिया गया था, उसका असर अब जमीन पर दिख रहा है. जहां पहले गोलियां चलती थीं, आज वहां विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा लहरा रहा है.
हालांकि, उन्होंने साफ चेताया कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ तो कड़ी कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन वैचारिक स्तर पर चुनौती अभी बाकी है. इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए.
'दिमागी नक्सल' पर PM मोदी का जोरदार वार
पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय तक माओवादी सोच के लोग सत्ता के गलियारों में जगह बनाकर बैठे रहे और सरकारी कमेटियों में सलाहकार बनकर नीतियों को प्रभावित किया. अब यही 'दिमागी नक्सल' नए पैंतरे आजमाकर युवाओं को भड़काने की फिराक में हैं. उन्होंने देशवासियों से भावुक अपील की कि ऐसे चेहरों को समय रहते पहचानकर समाज से पूरी तरह अलग-थलग (आइसोलेट) किया जाए, ताकि देश की युवा पीढ़ी गुमराह होने से बचे और विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जुड़ी रहे.
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इन चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा निशाना देश का नौजवान है. युवाओं को गलत राह पर जाने से रोकने के लिए ऐसे 'दिमागी नक्सलियों' को पहचानकर समाज से पूरी तरह अलग-थलग करना होगा.
इस दौरान, पीएम मोदी ने देश को नशामुक्त बनाने के लिए 100 सप्ताह के विशेष अभियान का आह्वान किया. इस मुहिम में माई भारत के वॉलंटियर्स, सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगठन मिलकर काम करेंगे. उन्होंने परिवारों से भी इस अभियान से जुड़ने की अपील की. इसके साथ ही उन्होंने बदलते दौर की सुरक्षा चुनौतियों पर सतर्क करते हुए कहा कि आज युद्ध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग और डेटा सेंटर जैसे अहम बुनियादी ढांचे भी निशाने पर हो सकते हैं. देश को इन खतरों से निपटने के लिए हर स्तर पर तैयार रहना होगा.
युवाओं और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप रखते हुए उन्होंने घोषणा की कि अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग दी जाएगी और छात्रों के लिए ऑनलाइन कोचिंग व्यवस्था शुरू होगी. आर्थिक तरक्की का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि 12 साल में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और मोबाइल उत्पादन 33 गुना बढ़ा है. विदेशी सामानों पर निर्भरता कम करने पर जोर देते हुए उन्होंने अगले सात साल में 5 से 8 सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू करने और परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के लिए 5 नए परमाणु रिएक्टर बनाने का लक्ष्य रखा.
'दिमागी नक्सल' का मतलब क्या है?
'दिमागी नक्सल' कोई आधिकारिक कानूनी श्रेणी नहीं है. यह एक राजनीतिक शब्द है. आम तौर पर इसका इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए किया जाता है, जिन पर नक्सली या माओवादी विचारों का वैचारिक समर्थन करने का आरोप लगाया जाता है. पीएम मोदी ने लाल किले के भाषण में इसी शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही.
aajtak.in