नेपाल के देवीघाट की नदी कभी सिर्फ पानी थी. आज वही नदी इस कस्बे की तबाही की गवाह बन गई है. नुवाकोट के देवीघाट में लोग बरसों से नदी के किनारे रहते आए थे. घरों की खिड़कियां नदी की ओर खुलती थीं. बच्चे नदी में नहाते थे, महिलाएं कपड़े धोती थीं और बुजुर्ग शाम को किनारे बैठकर बातें किया करते थे.
लेकिन अब सब कुछ बदल गया. पहाड़ों से अचानक उतरा पानी इतनी तेज रफ्तार से आया कि नदी अपने किनारों को पहचान नहीं सकी. देखते ही देखते बाढ़ ने घरों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया. दीवारें ढह गईं, छतें बहने लगीं और कई मकान मलबे में तब्दील हो गए.
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अगली सुबह जब धुंध छंटी तो देवीघाट की तस्वीर पहचानना मुश्किल था. सड़कें, गलियां और घरों के आंगन मोटी कीचड़ की परत से ढके थे. कई मकान आधे डूबे खड़े थे, जबकि कुछ पूरी तरह मलबे में बदल चुके थे.
जहां जिंदगी बसती थी आज वहां मलबा ही मलबा है
ड्रोन फुटेज में तबाही का मंजर देखा जा सकता है. टूटे घरों के बीच लोग अपनों को तलाश रहे हैं. कोई मलबे में अपने परिवार के सदस्य को खोज रहा है तो कोई चुपचाप नदी की ओर देख रहा है. जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक जिंदगी थी, वहां अब सिर्फ मलबा नजर आ रहा है.
एक युवक अपने बचपन के घर के सामने खड़ा है. दीवार पर उसके नाम की लिखावट अब भी दिखाई देती है, लेकिन घर अंदर से पूरी तरह उजड़ चुका है. एक मां अपने हाथ में भीगी हुई पारिवारिक तस्वीर लेकर बैठी है. उसकी आंखों में आंसू नहीं, बल्कि अपनों को खोने का गहरा दर्द है.
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राहत-बचाव टीमें रेस्क्यू में जुटीं
नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई है. देवीघाट भी इस त्रासदी से अछूता नहीं रहा. राहत और बचाव टीमें लोगों तक पहुंच रही हैं, लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया, उनके लिए यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकेगा.
पानी उतर जाएगा, कीचड़ सूख जाएगा और घर दोबारा बन जाएंगे. लेकिन जिन लोगों की जिंदगी चली गई, उनकी यादें हमेशा इस नदी के साथ जुड़ी रहेंगी. देवीघाट आज शांत है, लेकिन यहां बचे लोगों की आंखों में तबाही अब भी साफ दिखाई देती है.
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