कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग और केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. खड़गे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से खोखला किया है.
साजिश के तहत हटाए जा रहे लोगों के नाम
खड़गे ने आरोप लगाया कि साजिश के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) मोदी सरकार की 'कठपुतली' बन गए हैं. उन्होंने कहा कि हर योग्य नागरिक का वोट सुरक्षित रखना और हर वोट की निष्पक्ष गिनती सुनिश्चित करना लोकतंत्र की बुनियादी भावना है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने खुद CEC की गतिविधियों को 'मनमाना और अनुचित' बताया है. खरगे ने आरोप लगाया कि CEC की कोशिशें सत्तापक्ष को फायदा पहुंचाने की रही हैं. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने की मांग की. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी 'नैतिकता के आधार पर' इस्तीफा देने की मांग की.
'Form-6 के नियमों में गैरकानूनी बदलाव'
खड़गे ने युवाओं के मताधिकार का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि दिसंबर 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मतदान की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की थी. इसके उलट उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को मताधिकार से वंचित करने की 'साजिश' के तहत चुपचाप Form-6 के नियमों में बदलाव करवाया, जो उनके मुताबिक पूरी तरह गैरकानूनी है. उन्होंने कहा, 'नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं.' खड़गे ने कहा कि वोट का अधिकार किसी की ओर से मिली खैरात नहीं है, बल्कि इसके लिए लाखों लोगों ने कुर्बानियां दी हैं.
राहुल गांधी को दी बधाई
खड़गे ने राहुल गांधी की ओर से वोटर लिस्ट को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र के मामलों में मतदाता आंकड़ों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए थे. उन्होंने डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों, एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं और Form-6 से जुड़ी एंट्री का मुद्दा उठाया था. खड़गे ने दावा किया कि अगर चुनाव आयोग ने इन सवालों पर गंभीरता दिखाई होती तो आज उसकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठते.
चुनाव आयोग से कांग्रेस के 5 सवाल और मांगें
खड़गे ने सवाल किया कि SIR का फैसला किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को इंटरनल पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया. इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की पांच मांगें रखीं.
1. मतदाता सूची में बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए
2. हटाए गए मतदाताओं को सूचना और अपील का मौका मिले.
3. राजनीतिक दलों को जरूरी चुनावी डेटा सरल फॉर्मेट में समय पर दिया जाए.
4. गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो
5.चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा व फैसलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए.
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल चुनावी हार-जीत की लड़ाई के तौर पर नहीं देखती. उन्होंने कहा कि चुनाव और सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान स्थायी हैं.
उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए नोटबंदी की तुलना कथित 'वोटबंदी' से की. खरगे ने कहा कि नोटबंदी में गरीब लाइन में खड़ा था, जबकि 'वोटबंदी' में गरीब को लाइन से ही बाहर किया जा रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सामने पांच राज्यों के चुनाव हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि किसी मतदाता का अधिकार न मारा जाए. उन्होंने पार्टी से इस मुद्दे पर 'सड़क से संसद तक' लड़ाई लड़ने का आह्वान किया.
मौसमी सिंह