S-400 और ब्रह्मोस NG... ब्रिक्स से पहले PM मोदी-पुतिन के बीच किन मुद्दों पर बात

भारत और रूस अब ब्रह्मोस नेक्स्ट जेनरेशन डेवलप करने की तैयारी में है. इसका रेंज 800 किलोमीटर हो सकता है और इसमें और भी खूबियां होंगी. दिल्ली में 11 सितंबर को जब राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी मिलेंगे तो ब्रह्मोस NG और S-400 के पांचवें यूनिट की डिलीवरी पर बात होगी.

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नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 11 सितंबर से शुरू हो रहा है.  (File Photo: ITG) नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 11 सितंबर से शुरू हो रहा है. (File Photo: ITG)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:10 PM IST

भारत और रूस अब डिफेंस पार्टनरशिप को अगले स्तर पर ले जाएंगे. दिल्ली में शुरू होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 से पहले 11 सितंबर को जब पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन मिलेंगे तो दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच एयर डिफेंस सिस्टम S-400 के अगले फेज की डिलीवरी और ब्रह्मोस मिसाइल के डेवलपमेंट पर बात होगी. नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने जा रहा है.  

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क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा, "रूस अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी करने में सक्षम है और उन्हें पूरा किया जाएगा. हमारे दोनों नेताओं के बीच बातचीत में इस मुद्दे का ज़िक्र हो रहा है."

भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पांच S-400 ट्रायम्फ रेजिमेंट के लिए 5.43 अरब डॉलर (40,000 करोड़ रुपये) का समझौता किया था. इनमें से चार रेजिमेंट पहले ही मिल चुकी हैं और काम कर रही हैं. तीन स्क्वाड्रन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ पंजाब, राजस्थान और जम्मू सेक्टर में तैनात हैं, जबकि एक स्क्वाड्रन चीन के ख़िलाफ़ उत्तर में तैनात है. 

मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान 300+ किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के मिसाइल को इंटरसेप्ट करके सबसे लंबी दूरी का 'किल' हासिल करने का श्रेय S-400 को जाता है. इस एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के AEW&C को नष्ट कर दिया और उसकी हवाई बढ़त को खत्म कर दिया.

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बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण पांचवीं और आखिरी स्क्वाड्रन की डिलीवरी में देरी हुई है. अब इसके नवंबर 2026 तक मिलने का भरोसा है.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों ने भी गजब का प्रदर्शन किया था. 

ब्रह्मोस पर चर्चा करते हुए पेस्कोव ने कहा, "हम मिलकर ब्रह्मोस मिसाइलों का उत्पादन कर रहे हैं, और अब समय आ गया है कि इन मिसाइलों को बेहतर बनाने, इनमें कुछ अलग से खूबियां जोड़ने और इन्हें बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावी बनाने के बारे में सोचा जाए."

दरअसल भारत और रूस की तैयारी ब्रह्मोस नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल विकसित करने की है. 

BrahMos-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) हल्का (पुराने 2.9 टन के मुकाबले 1.3 टन) और छोटा है. इसकी स्पीड Mach 3.5 है और रेंज 400 KM से ज़्यादा है. इसे तेजस और MiG-29 से लॉन्च किया जा सकता है. एक फाइटर जेट पर 6-7 मिसाइलें लग सकती हैं, जबकि अभी Su-30MKI पर सिर्फ़ एक मिसाइल लगती है. 

रूस के साथ इस मिसाइल के जॉइंट प्रोडक्शन पर बातचीत होनी है. इसकी रेंज पहले ही 450 KM हो चुकी है और अब इसे 800 KM तक ले जाने की तैयारी है.  इसके एयर-लॉन्च होने वाले वर्शन का इस्तेमाल 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला करने के लिए किया गया था. 

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बता दें कि भारत द्वारा किए जा रहे हथियारों के आयात में रूस की हिस्सेदारी 51% से घटकर 40% हो गई है, लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' में इसके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए मॉस्को अब सिर्फ़ खरीदार-विक्रेता के रिश्ते से आगे बढ़कर जॉइंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट, को-प्रोडक्शन और तीसरे मित्र देशों को एक्सपोर्ट करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. 

फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल खरीद चुका है और कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश भी इसे खरीदने की कतार में हैं. 
 

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