भारत ने तुर्की के साथ अपने डिप्लोमेटिक संबंधों को पटरी पर लाने का संकेत दिया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. एमईए की जॉइंट सेक्रेटरी अल्पना दुबे गुरुवार को नई दिल्ली में तुर्की के नेशनल डे सेलिब्रेशन में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुईं. एमईए में दक्षिणी यूरोप मामलों को देखने वालीं दुबे, भारत में तुर्की के राजदूत अली मूरत एर्सॉय के साथ इस कार्यक्रम में शामिल हुईं.
अपने संबोधन के दौरान, दुबे ने भारत और तुर्की के बीच मजबूत होती आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया और आर्थिक सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का एक अहम स्तंभ बताया. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को भी दोहराया और कहा कि भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस रखता है.
यह घटनाक्रम 2025 में तुर्की के नेशनल डे सेलिब्रेशन से भारतीय अधिकारियों के दूर रहने के एक साल बाद हुआ है. 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान तुर्की के पाकिस्तान को कथित समर्थन दिए जाने के कारण ऐसा हुआ था.
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी मिलिट्री की ओर से तुर्की में बने ड्रोन्स का इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इसके अलावा ऑपरेशन के कुछ ही हफ्तों बाद तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव के साथ त्रिपक्षीय मीटिंग भी की थी.
इस्लामाबाद को मिले इस सपोर्ट से चिंताएं बढ़ गई थीं, जिसके बाद 2025 में भारतीय अधिकारियों को तुर्की के नेशनल डे में शामिल न होने की औपचारिक सलाह दी गई थी.
इस साल एमईए ऑफिशियल की भागीदारी को एक कूटनीतिक शिष्टाचार के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि भारत अब तुर्की और अजरबैजान के साथ अपने रिश्तों को स्टेबलाइज करना चाहता है.
सुबोध कुमार