संसद (लोकसभा) में हाल ही में विदेशों में काम रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके रोजगार से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. दरअसल, हाल ही में UAE के दुबई में स्थित ईरानी अस्पताल बंद कर दिया गया. हॉस्पिटल बंद हो जाने से वहां काम करने वाले तकरीबन 130 से अधिक हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स गंभीर परेशानी में फंस गए हैं. इस मामले पर केरल के सांसद जोस के. मणि ने सरकार से तीखे सवाल पूछे.
संसद में चर्चा के दौरान जोस के.मणि ने विदेश मंत्रालय से चार प्रमुख बिंदुओं पर सवाल किए. उन्होंने कहा कि क्या सरकार को केरल और अन्य राज्यों के इन स्वास्थ कर्मियों पर लगी वीजा पाबंदियों की जानकारी है? प्रभावित होने वाले भारतीयों की कुल संख्या कितनी है और वे किन राज्यों से हैं?
उन्होंने सरकार से ये भी सवाल किया कि क्या भारतीय दूतावास ने इस मामले को सुलझाने के लिए यूएई सरकार से कोई बातचीत की है? संकट में फंसे इन नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है? केरल के सांसद के इन सवालों का विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जवाब दिया है.
दरअसल, दुबई का ईरानी अस्पताल वहां रहने वाले प्रवासियों और स्थानीय लोगों के बीच काफी समय से मेडिकल सेवाएं दे रहा था. इस अस्पताल में बड़ी संख्या में भारतीय डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ काम कर रहे थे, जिनमें से अधिकांश लोग केरल के रहने वाले हैं.
लेकिन हाल ही में स्थानीय UAE सरकार के एक फैसले के बाद इस अस्पताल को बंद कर दिया गया. अस्पताल बंद होने का सीधा असर वहां काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों पर पड़ा. उनकी नौकरियां चली गई. साथ ही उनके वीजा पर भी पाबंदियां लगा दी गईं. इस वजह से वे न तो अपना वीजा रिन्यु करा पा रहे हैं और न ही यूएई में किसी दूसरे अस्पताल में नौकरी ढूंढ पा रहे हैं.
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ईरानी अस्पताल बंद होने 130 लोग प्रभावित
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सरकार की ओर से लिखित जवाब देते हुए कहा कि सरकार विदेशों में रहने वाले अपने नागरिकों के हित भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. सरकार इस पूरे घटनाक्रम से पूरी तरह वाकिफ है.
कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि अस्पताल बंद होने से 130 से अधिक भारतीय नागरिक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. यूएई में मौजूद भारतीय दूतावास (Indian Embassy) और वाणिज्य दूतावास (Consulate) लगातार इन प्रभावित कर्मचारियों के संपर्क में हैं. उन्हें हर संभव कानूनी और काउंसलर असिस्टेंस दी जा रही है. भारत सरकार ने इस गंभीर मुद्दे को राजनयिक चैनलों के जरिए यूएई के स्थानीय अधिकारियों के सामने उठाया है ताकि इन कर्मचारियों के वीजा और वर्क परमिट का कोई रास्ता निकाला जा सके.
जवाब के आखिर में विदेश राज्य मंत्री ने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक बात भी साफ की. उन्होंने कहा कि वीजा देने, उसकी अवधि बढ़ाने या उस पर रोक लगाने का फैसला किसी भी देश का अपना संप्रभु अधिकार होता है। यानी, भारत सरकार यूएई पर दबाव तो बना सकती है और बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर सकती है, लेकिन वह यूएई को अपने इमीग्रेशन रूल्स को बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है.
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