दुबई से चल रहे 250 करोड़ के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश, MBA छात्र समेत 19 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात पुलिस के 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' में दुबई से संचालित 250 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है. पांच शहरों में कार्रवाई करते हुए 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें एक निजी यूनिवर्सिटी का MBA छात्र भी शामिल है, जिसने पढ़ाई के दौरान कई बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों की साइबर ठगी में मदद की.

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फर्जी और किराए के बैंक खातों से चलता था पूरा खेल.(Photo: Brijesh Doshi/ITG) फर्जी और किराए के बैंक खातों से चलता था पूरा खेल.(Photo: Brijesh Doshi/ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • गांधीनगर,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:15 PM IST

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने देश के बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा करते हुए 250 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का पर्दाफाश किया है. 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत पांच शहरों में एक साथ कार्रवाई कर 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में इन आरोपियों के तार देश के 21 राज्यों में दर्ज 146 साइबर अपराधों से जुड़े मिले हैं.

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दरअसल, यह कार्रवाई गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से वडोदरा, भावनगर, सूरत, पाटन और गांधीनगर में दर्ज पांच बड़े साइबर फ्रॉड मामलों की जांच के दौरान की गई. पुलिस का दावा है कि यह गिरोह देशभर में साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का नेटवर्क तैयार कर करोड़ों रुपये के लेनदेन को अंजाम देता था.

यह भी पढ़ें: ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0: गुजरात पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 2289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 638 गिरफ्तार

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले कुछ मुख्य आरोपी दुबई से गतिविधियों को नियंत्रित कर रहे थे. वहीं भारत में कई लोग बैंक खाते उपलब्ध कराने, रकम ट्रांसफर कराने और अन्य तकनीकी मदद देने का काम कर रहे थे.

फर्जी और किराए के बैंक खातों से चलता था पूरा खेल

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साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के एसपी डॉ. राजदीपसिंह झाला ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपी कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराते थे. इसके लिए नकली और किराए पर लिए गए बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था.

आरोपी बल्क मोड बैंकिंग सुविधा के जरिए बड़ी संख्या में एक साथ ट्रांजैक्शन करते थे, जिससे करोड़ों रुपये की ठगी की रकम अलग-अलग खातों में तेजी से ट्रांसफर हो जाती थी. इससे जांच एजेंसियों के लिए पैसों के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था.

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को APK फाइल और अन्य एप्लिकेशन डाउनलोड करवाते थे. इसके अलावा इन्वेस्टमेंट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, डिपॉजिट स्कीम और UPI ऑफर का लालच देकर लोगों से बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था.

सूरत में बना रखा था ऑफिस, दुबई से मिलते थे निर्देश

पुलिस जांच में पता चला कि सूरत के मोटा वराछा और जहांगीरपुरा इलाके में ऑफिस बनाकर इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था. मेहसाणा और गांधीनगर से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क के कुछ मुख्य संचालक दुबई से पूरे रैकेट को निर्देश दे रहे थे.

जांच के दौरान एक आरोपी के बैंक खाते में 161 करोड़ रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन सामने आए हैं. पुलिस ने उस खाते के मुख्य हैंडलर को भी गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि अब पूरे मनी ट्रेल और विदेश से जुड़े नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.

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वहीं, वडोदरा से चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. इनके खिलाफ देशभर में 101 से अधिक साइबर अपराध दर्ज होने की जानकारी मिली है. शुरुआती जांच में सिर्फ इन्हीं मामलों में 46 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है.

MBA छात्र ने पढ़ाई के दौरान खुलवाए 10 से ज्यादा बैंक खाते

जांच में सबसे हैरान करने वाला खुलासा वडोदरा की एक निजी यूनिवर्सिटी के MBA छात्र को लेकर हुआ. पुलिस के मुताबिक, आरोपी पढ़ाई के दौरान ही अपने साथी छात्रों और परिचितों के नाम पर 10 से ज्यादा बैंक खाते खुलवाने में सफल रहा.

इन्हीं खातों के जरिए 7.40 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खिलाफ देशभर में 28 साइबर शिकायतें दर्ज हैं. पुलिस ने उसे 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के तहत गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में से एक हत्या के मामले में भी वांछित है. फिलहाल साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पूरे नेटवर्क, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और विदेश में बैठे संचालकों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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