यूपी, बंगाल, ओडिशा और असम में बाढ़ का संकट, प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट

उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में भारी बारिश और प्रमुख बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण नदियां उफान पर हैं. मैदानी इलाकों के सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और लाखों की आबादी बाढ़ के संकट से जूझ रही है.

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उत्तर भारत में बाढ़ का कहर, लाखों प्रभावित.  (File Photo: REUTERS/Hafiz Ahmed) उत्तर भारत में बाढ़ का कहर, लाखों प्रभावित. (File Photo: REUTERS/Hafiz Ahmed)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:31 AM IST

पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश और प्रमुख बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में नदियां उफान पर हैं. मैदानी इलाकों के सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और लाखों की आबादी बाढ़ के संकट से जूझ रही है. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर आपदा प्रबंधन और जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है. वहीं, ओडिशा में 12.85 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल और असम में राहत तथा बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं.

पहाड़ों पर बारिश के चलते गंगा और सरयू नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा रहा है. बिजनौर में हरिद्वार बैराज से गंगा में 1.80 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिलाधिकारी और एसडीएम स्थिति पर नजर रख रहे हैं. जिला नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कर दिया गया है. आपदा प्रबंधक प्रशांत सक्सेना के अनुसार, 'सचेत ऐप' के जरिए हर दो घंटे में अधिकारियों, ग्राम प्रधानों और आपदा मित्रों को अलर्ट भेजा जा रहा है. चौपालों के जरिए ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है.

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प्रशासन ने स्थापित कीं 32 बाढ़ चौकियां

बिजनौर जिले में 24 संवेदनशील और 5 अति संवेदनशील जगहों चिह्नित किया गया है. गंगा और खोह नदियों के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी हो रही है. चांदपुर और नगीना तहसील के दतियाना, रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी गांवों के रास्तों पर पानी भरने के बाद नावें तैनात की गई हैं. प्राथमिक स्कूलों में 4 बाढ़ राहत चौकियां बनाई गई हैं. पूरे जिले में 32 बाढ़ चौकियां और 35 आश्रय केंद्र सक्रिय कर 300 राशन किट बांटी गई हैं.

बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और अधिकतम डिस्चार्ज 4.35 लाख क्यूसेक से अधिक दर्ज किया गया है. बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह के अनुसार बाढ़ से पहले लगाए गए जियोबैग स्टड, पोरक्यूपाइन, स्पर और रिवेटमेंट ने नदी की मुख्य धारा को दाएं से बाएं किनारे की ओर मोड़ दिया. इसके चलते जलस्तर बढ़ने के बावजूद कटान न्यूनतम रहा और गांव व तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं.

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कानपुर के 176 गांवों में अलर्ट

वहीं, कानपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ संभावित क्षेत्रों के करीब 176 गांवों को अलर्ट पर रखा गया है. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में 35 चौकियां स्थापित की गई हैं.

एनडीआरएफ की 36 सदस्यीय टीम, 100 गोताखोर, पीएसी और पुलिस बल तैनात किया गया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर अपस्ट्रीम में 113.570 मीटर और डाउनस्ट्रीम में 113.420 मीटर दर्ज किया गया.

बंगाल में भी बाढ़ जैसे हालात 

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सबंग ब्लॉक में भारी बारिश और केलेघई नदी के उफान से आई बाढ़ का मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हवाई सर्वेक्षण किया. उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले दो लोगों के परिवारों को 9-9 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की. सबंग ब्लॉक में 3,200 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनके परिवारों को 30,000 रुपये की सहायता दी जाएगी.

मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि केलेघई नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान से नीचे आ गया है. राहत शिविरों में रह रहे लोगों को पांच दिन के राशन के साथ घर भेजा गया है. जलभराव वाले क्षेत्रों में पुलिस 20 लीटर पीने का पानी और राशन पहुंचा रही है. राज्य मंत्री राजेश महतो राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं. धान किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कैंप शुरू किए गए हैं.

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ओडिशा में गंभीर हुई स्थिति

ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां 6 जिलों में 12.85 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. झारखंड के गालूडीह बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण सुवर्णरेखा नदी जलेश्वर के राजघाट पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.

विशेष राहत आयुक्त राजेश पी पाटिल के अनुसार, बालेश्वर के भोगराई और बालियापाल ब्लॉक में पानी भर गया है. बालेश्वर में सुवर्णरेखा, जलका और बूढ़ाबलंग नदियों के उफान से 331 गांव प्रभावित हैं.


ओडिशा के बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपड़ा, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में बाढ़ से तटबंध टूटे हैं. कुल 4,28,475 लोगों को सुरक्षित निकालकर 728 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है. बालेश्वर में स्टेट हाईवे 57 पर पानी भरने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है. केंद्रपड़ा के राजकनिका ब्लॉक में लूना नदी का तटबंध 50 फीट टूटने से चार पंचायतें जलमग्न हो गईं. एनडीआरएफ और ओडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं.

असम में बाढ़ से 23 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार राज्य में बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन गोलाघाट, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर जिलों में 23,800 से ज्यादा लोग अब भी प्रभावित हैं. नगांव सबसे अधिक प्रभावित है, जहां करीब 15,000 लोग प्रभावित हैं. राज्य में इस साल बाढ़ से मृतकों की संख्या 105 बनी हुई है.

असम में वर्तमान में 115 गांव जलमग्न हैं और 3,206 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है. नूमलीगढ़ में धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. प्रशासन 4 जिलों में 10 राहत शिविर और वितरण केंद्र संचालित कर रहा है. बाढ़ के कारण 14,645 मवेशी और पोल्ट्री प्रभावित हुए हैं. सड़कों, पुलों और तटबंधों को दुरुस्त करने का काम जारी है.

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