NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे देश के सबसे चर्चित छात्र आंदोलनों में बदल गया. इस दौरान अदालत की एक टिप्पणी पर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ. फिर एक नया संगठन बना, जंतर-मंतर पर लंबा धरना चला, सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े और मामला संसद मार्च तक पहुंच गया. आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया. आइए समझते हैं कि करीब दो महीने में यह पूरा घटनाक्रम कैसे आगे बढ़ा.
इस पूरी कहानी की शुरुआत 3 मई 2026 से होती है. इसी दिन NEET-UG परीक्षा हुई थी, जिसके खत्म होते ही पेपर लीक और धांधली के गंभीर सवाल खड़े हो गए. देखते ही देखते कई छात्र विरोध में उतर आए और सोशल मीडिया पर पोस्ट का दौर चल पड़ा. परीक्षा की निष्पक्षता पर उठे इन सवालों ने ही उस विवाद को जन्म दिया, जो आगे चलकर देश का बड़ा और चर्चित छात्र आंदोलन बन गया.
CJI की टिप्पणी से छिड़ी नई बहस
दरअसल, 15 मई 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ लोग रोजगार नहीं मिलने पर सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं. ऐसे लोगों के लिए उन्होंने 'कॉकरोच' शब्द का इस्तेमाल किया. यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं ने इसका विरोध किया. हालांकि, बाद में CJI ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी आम युवाओं के लिए नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनका बयान फर्जी डिग्री के सहारे पेशे में घुसने वाले लोगों के संदर्भ में था. हालांकि तब तक इस टिप्पणी को लेकर विवाद काफी बढ़ चुका था.
CJI की टिप्पणी के विरोध में 16 मई 2026 को अभिजीत दिपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का ऐलान किया. यह मुहिम सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुई थी. 6 जून को अभिजीत अमेरिका से भारत लौटे, जिसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन तेज हो गया. CJP ने परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पुरजोर मांग उठाई.
सोनम वांगचुक के जुड़ने से बढ़ा दबाव
28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. NEET पेपर लीक मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर वह लगातार 20 दिनों तक अनशन पर डटे रहे. उनके जुड़ने के बाद इस छात्र आंदोलन को देशभर में नई पहचान मिली. लगातार भूख हड़ताल के कारण सेहत बिगड़ने पर दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस 18 जुलाई को उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई. बाद में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सरकार के प्रतिनिधियों ने उनसे संपर्क साधा. आखिरकार मांगों पर भरोसा मिलने के बाद 23-24 जुलाई की दरमियानी रात उन्होंने 26 दिनों से चला आ रहा अपना अनशन समाप्त कर दिया.
संसद मार्च के दौरान टकराव
20 जुलाई 2026 को CJP ने जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला. रास्ते में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया. इसके बाद झड़प हुई, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया. इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया.
आंदोलन की गूंज अब जंतर-मंतर से निकलकर राजनीति तक पहुंच चुकी थी. 22 जुलाई 2026 को राहुल गांधी ने नई दिल्ली में 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक धरना दिया. उनकी मांग थी कि NEET-UG में गड़बड़ियों की जवाबदेही तय हो और धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया. इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई.
सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था, जिसके चलते 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया. इस खबर के आते ही जंतर-मंतर का माहौल पूरी तरह बदल गया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे अपने संघर्ष की बड़ी सफलता माना और एक-दूसरे को बधाई देकर जीत का जश्न मनाया. इसके बाद CJP ने अपना आंदोलन खत्म करने का ऐलान कर दिया. हालांकि युवाओं का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है. परीक्षा व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय कराने के लिए आगे भी आवाज उठाई जाती रहेगी.
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