FCRA बिल पर विपक्ष में फूट, कांग्रेस की वापसी की मांग तो TMC-DMK की अलग राह

एफसीआरए संशोधन बिल 2026 पर विपक्ष के भीतर साफ फूट दिखी, जहां कांग्रेस ने इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग दोहराई, टीएमसी, डीएमके और बीजेडी ने जेपीसी के रास्ते पर सहमति या शर्तों के साथ समर्थन जताया, और सरकार भी संसद में पेश करने से पहले इसी विकल्प पर विचार करती दिख रही है.

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FCRA बिल को JPC में भेजने की तैयारी है. (Photo- PTI) FCRA बिल को JPC में भेजने की तैयारी है. (Photo- PTI)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर विपक्षी दलों के बीच एक राय नहीं बन पा रही है. कांग्रेस जहां बिल को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं टीएमसी, डीएमके और बीजेडी की तरफ से इसे जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी यानी जेपीसी के पास भेजने की मांग सामने आई है. सरकार भी बिल को जेपीसी में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है.

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एफसीआरए बिल को लेकर कांग्रेस का रुख फिलहाल सबसे सख्त है. पार्टी इसे वापस लेने की मांग कर रही है. विपक्षी दलों के बीच चर्चा के दौरान बिल को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है. वहीं, सरकार की ओर से विपक्षी दलों से बातचीत कर जेपीसी के रास्ते पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है.

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TMC, DMK और BJD की JPC की मांग

टीएमसी ने राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में पहले बिल को जेपीसी के पास भेजने की बात कही थी, हालांकि बाद में पार्टी की तरफ से इसे वापस लेने की मांग भी सामने आई. डीएमके का कहना है कि बिल को या तो वापस लिया जाए या फिर विस्तृत जांच के लिए जेपीसी के पास भेजा जाए. बीजेडी ने भी बिल को जेपीसी में भेजने की मांग की है.

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एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी केंद्र से बिल वापस लेने या जेपीसी के पास भेजने की मांग की है. उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता.

सरकार की तैयारी, लेकिन संसद की तस्वीर अभी साफ नहीं

एफसीआरए संशोधन बिल 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था. इसके बाद विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के चलते इसे आगे बढ़ाने पर रोक लगी रही. बिल में विदेशी योगदान हासिल करने वाली संस्थाओं के एफसीआरए रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में उनसे जुड़े एसेट्स के प्रबंधन और निगरानी के लिए नई व्यवस्था का प्रस्ताव है.

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सोमवार की बीएसी बैठक में एफसीआरए बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल एजेंडे में शामिल नहीं थे. ऐसे में अब सरकार के सामने विपक्ष से सहमति बनाने और बिल को आगे बढ़ाने के लिए जेपीसी का विकल्प मौजूद है. हालांकि, विपक्षी दलों के बीच ही बिल को लेकर अलग-अलग रुख होने से आगे की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है.

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