पंजाब से फिर दिल्ली कूच की तैयारी में किसान, जानिए कौन सी मांगें हुईं पूरी, कौन सी रह गईं अधूरी?

तीनों कृषि कानूनों की वापसी के बाद लग रहा था कि किसान आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन एक बार फिर पंजाब के पांच संगठन दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं. किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने जो वादे किए थे, वो पूरे नहीं किए गए. जानिए- आखिर वो कौन सी मांगें थीं, जिन्हें अब तक पूरी नहीं करने का दावा किया गया है.

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पंजाब के किसान संगठन आज दिल्ली कूच कर रहे हैं. (फाइल फोटो- PTI) पंजाब के किसान संगठन आज दिल्ली कूच कर रहे हैं. (फाइल फोटो- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

एक बार फिर किसान संगठन दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं. पांच किसान संगठन आज संसद भवन की ओर मार्च करेंगे. इससे पहले जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन भी है.

जानकारी के मुताबिक, पंजाब से आ रहे ये किसान दिल्ली में गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास जुटेंगे और यहां से संसद भवन की ओर मार्च करेंगे.

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि केंद्र सरकार अपने वादे पूरे करने में नाकाम रही है. संयुक्त किसान मोर्चा 20 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर महापंचायत भी करने वाली है.

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कृषि कानून रद्द, फिर अब दिल्ली कूच क्यों?

- केंद्र सरकार के तीन कृषि कानून के खिलाफ 26 नवंबर 2020 को किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था. लगभग एक साल तक चले आंदोलने के बाद इन तीनों कानूनों को रद्द कर दिया गया था.

- 19 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तीनों कानूनों की वापसी का ऐलान किया था. इसके बाद ये किसान आंदोलन खत्म हो गया था.

- हालांकि, अब किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनसे जो वादे किए थे, वो अब तक पूरे नहीं हुए हैं. 

कौन सी मांगें पूरी नहीं हुईं?

- किसान संगठनों की सबसे बड़ी मांग एमएसपी पर कानून बनाने की है. एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य.

- संगठनों का दावा है कि सरकार ने एमएसपी की गारंटी पर कानून बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है.

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- किसान संगठन चाहते हैं कि स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फॉर्मूले के हिसाब से एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए.

- इसके अलावा किसान संगठनों की एक मांग ये भी है कि आंदोलन के दौरान जिन किसानों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, उन्हें वापस लिया जाए.

कौन-कौन से संगठन हैं इसमें शामिल?

- अभी इसमें पंजाब के पांच किसान संगठन शामिल हो रहे हैं. इनमें- भारतीय किसान फेडरेशन, भारतीय किसान यूनियन (मानसा), भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल), आजाद किसान संघर्ष कमेटी और किसान संघर्ष कमेटी शामिल है.

क्या फिर से शुरू होगा किसान आंदोलन?

- 19 नवंबर 2021 को पीएम मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान किया था. इसके बाद 9 दिसंबर 2021 को किसान संगठनों ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया था.

- उस समय किसान संगठनों ने साफ कहा था कि आंदोलन को सिर्फ स्थगित किया जा रहा है और अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन फिर से शुरू हो जाएगा.

- उस वक्त किसान संगठनों ने 6 मांगों के साथ एक चिट्ठी केंद्र सरकार को लिखी थी. इस पर केंद्र सरकार का जवाब आने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था.

- केंद्र सरकार ने जवाब देते हुए लिखा था कि एमएसपी को लेकर एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा. वहीं, केस वापसी पर भी सरकार ने कहा था कि जिन-जिन राज्यों में किसानों पर मामले दर्ज हैं, उन्हें वापस ले लिया जाएगा. 

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क्या थे वो तीन कानून, जिनसे शुरू हुआ था आंदोलन?

1. कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण): किसानों और कारोबारियों को सरकारी मंडी (APMC) के बाहर फसल बेचने की आजादी का प्रावधान था.

2. कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक: कृषि करारों का प्रावधान किया गया था. फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्म, प्रोसेसर्स, थोक और खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जोड़ने का प्रावधान था.

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन): इसमें अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से हटाने का प्रावधान था.


 

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