'विचारों का मतभेद सामान्य बात', दावों पर आया चुनाव आयोग का बयान

SIR और चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद को लेकर उठ रहे सवालों के बीच ECI ने कहा कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां अंतिम फैसले से पहले होने वाली सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं. आयोग ने अपने सभी फैसलों को कानून और तय प्रक्रिया के मुताबिक बताया है.

Advertisement
मीडिया रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों पर EC ने बयान जारी किया है. (Photo- ECI) मीडिया रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों पर EC ने बयान जारी किया है. (Photo- ECI)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेद की रिपोर्ट के बीच अब ECI ने विस्तृत बयान जारी किया है. आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, कानून और तय संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाला संवैधानिक निकाय है. आयोग ने साफ किया कि लिखित नोट, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं.

Advertisement

ECI के मुताबिक, आयोग के सदस्य किसी मुद्दे पर ड्राफ्ट तैयार होने के दौरान सवाल उठा सकते हैं, स्पष्टीकरण मांग सकते हैं या सुझाव दे सकते हैं. इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा करना है. आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था में अंतिम फैसला लेने से पहले होने वाली सामान्य प्रक्रिया हैं.

यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग में रार पर विपक्ष का वार... जानें राहुल गांधी-अखिलेश यादव, सिब्बल-सिंघवी-केजरीवाल ने किन तर्कों से घेरा

सभी फैसले कानून और तय प्रक्रिया के तहत- EC

चुनाव आयोग ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं. आयोग ने बताया कि तीनों चुनाव आयुक्तों के साथ-साथ आयोग का कोई भी अधिकारी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव दे सकता है.

Advertisement

ECI ने कहा कि पिछले 10 महीनों की कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों को अलग से दिखाने पर पूरी तस्वीर सामने नहीं आती. आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में कई फैसले लिए गए, निर्देश जारी किए गए और करीब 40 नई पहल शुरू की गईं. इनमें देशभर में वोटर लिस्ट रिवीजन और SIR से जुड़े काम भी शामिल हैं. आयोग का दावा है कि पिछले एक साल में ये सभी फैसले पूरी आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं.

बिहार से बंगाल तक चुनावों का दिया हवाला

आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में हुए बड़े चुनावों का भी जिक्र किया. ECI के मुताबिक, इन चुनावों के दौरान बड़े स्तर पर प्रशासनिक और ऑपरेशनल काम हुआ और इसके लिए आयोग की ओर से कई मंजूरियां और निर्देश जारी किए गए.

आयोग ने कहा कि इन चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान भी पूरी मशीनरी ने कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक काम किया. ECI ने अपने बयान में कहा कि उसके कामकाज को सिर्फ कुछ आंतरिक टिप्पणियों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: SIR के बीच चुनाव आयुक्तों में मतभेद? EC ने दिया जवाब, राहुल गांधी बोले- वोट चोरी राजद्रोह है

ECINET और वोटर डेटा पर भी सफाई

Advertisement

चुनाव आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET को लेकर उठ रहे सवालों पर भी जवाब दिया. आयोग के मुताबिक, ECINET सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करता है. इसका मकसद बिना अनुमति डेटा में छेड़छाड़ या बदलाव को रोकना है. ECI ने कहा कि आईटी सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल राष्ट्रीय स्तर के डेटा सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली सामान्य साइबर सिक्योरिटी व्यवस्था हैं.

आयोग ने कहा कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर यानी DEO जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत वोटर रजिस्ट्रेशन और नाम हटाने से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं.

ECI ने कहा कि उसके अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों का मकसद चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाना है. आयोग ने दोहराया कि उसके सभी काम कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक हुए हैं और वह अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »