कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उसके हलफनामे को भ्रामक, छलपूर्ण और डबल स्टैंडर्ड बताया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, वह खुद आयोग के लिए भी बेहद नुकसानदेह है. उन्होंने अपने बयान में फॉर्म 6 में कथित गैरकानूनी संशोधन, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के फैसलों, ECINet के इस्तेमाल और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए.
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए नए डिक्लेरेशन को लेकर विरोधाभासी दावे किए हैं. उनके मुताबिक, पहले आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस डिक्लेरेशन को सही ठहराया था, लेकिन बाद में कोर्ट ने इस दावे का खंडन किया. रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग अब कह रहा है कि नया डिक्लेरेशन अलग फॉर्म है और फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ. जबकि उनके मुताबिक, इस डिक्लेरेशन के बिना ऑनलाइन फॉर्म 6 जमा नहीं किया जा सकता था.
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कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि 26 सितंबर को आयोग ने कहा था कि डिक्लेरेशन को फॉर्म 6 के साथ जोड़ा गया है, जबकि अब वह इसे फॉर्म 6 का हिस्सा मानने से इनकार कर रहा है. रमेश ने इसे रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1960 का उल्लंघन बताया.
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज करने का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि SIR से जुड़े फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया. उन्होंने दावा किया कि दोनों आयुक्तों को कुछ फैसलों की जानकारी भी नहीं दी गई. उन्हें इनके बारे में मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला. रमेश ने इसे सर्वसम्मति से फैसले लेने के बजाय एकतरफा निर्णय लेने का मामला बताया.
ECINet और IT डिवीजन पर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ECINet के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण केंद्रीकृत किया गया और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) के अधिकारों को दरकिनार किया गया. उन्होंने गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का जिक्र करते हुए कहा कि कई राज्यों में EROs के फैसले पलटे जाने के मामले सामने आए हैं.
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उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के IT डिवीजन के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर फैसले लेने पर चिंता जताई थी. रमेश के मुताबिक, इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
SIR प्रक्रिया और फॉर्म 7 पर आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने SIR प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग हर राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया गया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के हलफनामे में मीडिया में सामने आए खुलासों की सच्चाई से इनकार नहीं किया गया है. जयराम रमेश ने अपने बयान के आखिर में कहा कि लंबे समय तक झूठ बोलने से व्यक्ति अपने ही बुने जाल में उलझ जाता है और आखिरकार उसका झूठ सामने आने लगता है.
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