रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर ED का शिकंजा: 187 करोड़ रुपये के फंड हेराफेरी मामले में दाखिल की चार्जशीट

प्रवर्तन निदेशालय ने 2010 की सड़क निर्माण परियोजनाओं में 187 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. जांच में फर्जी दस्तावेजों और शेल कंपनियों के जरिए फंड के गलत इस्तेमाल का खुलासा हुआ.

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187 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग मामले में  चार्जशीट दाखिल की है. 187 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की है.

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय ED ने 187 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, सतीश सेठ और अन्य लोगों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह मामला साल 2010 के दौरान सड़क निर्माण परियोजनाओं से जुड़े फंड के कथित गलत इस्तेमाल और फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है.

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई इस साल 11 फरवरी को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा EOW की ओर से दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और फर्जी बैंक खातों के जरिए बनाई गई फर्जी यानी शेल कंपनियों से जुड़ा है. इनका इस्तेमाल गलत तरीके से पैसे ट्रांसफर करने और जाली बिलों के जरिए पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया गया था.

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ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण NHAI के दिए गए चार बड़े टोल-रोड प्रोजेक्ट्स के सार्वजनिक फंड को एक सोची-समझी साजिश के तहत डायवर्ट किया गया था. 

जिन प्रोजेक्ट्स में यह गड़बड़ी पाई गई, उनमें त्रिची-करूर (NH-67), त्रिची-डिंडीगुल (NH-45), सलेम-उलुंदुरपेट (NH-68) और जयपुर-रींगस (NH-11) शामिल हैं. इन सभी परियोजनाओं के लिए एनएचएआई से ग्रांट और देश के विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भारी-भरकम लोन लिया गया था.

जांच एजेंसी के मुताबिक,  सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान फर्जी या बैक-डेटेड सब-कांट्रैक्टिंग के जरिए करीब 187 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई थी. पैसों के इस अवैध लेन-देन की जांच करने पर पता चला कि फंड पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर या उसकी प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक कंपनियों (SPVs) से होते हुए निर्माण ठेकेदारों तक पहुंचे. फिर वहां से उन फर्जी कंपनियों के खातों में चले गए जिनका सड़क निर्माण के काम से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था.

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आरोपियों ने बाद में इन फर्जी ट्रांजैक्शन को सही साबित करने के लिए झूठे दस्तावेज भी तैयार किए थे, जिन्हें बाद में हीरा कारोबारियों और शेल कंपनियों के जरिए लेयरिंग कर ठिकाने लगाया गया.

संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं कुर्क

कानूनी शिकंजा कसते हुए ईडी ने इस मामले में पहले ही बड़ी कार्रवाई की थी. 3 अगस्त को केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले से जुड़ी 187 करोड़ रुपये की संपत्तियों को प्रोविजनल तौर पर अटैच  कर लिया था. इन कुर्क की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से रखी गई रिलायंस पावर लिमिटेड की इक्विटी शेयर और अचल संपत्तियां और क्षीराब्ध कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की जमीन शामिल है.

इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ने पहले ही बड़ा कदम उठाते हुए सतीश सेठ को इस साल 12 जून को गिरफ्तार कर लिया था, जो फिलहाल ज्यडुशियल कस्टडी में जेल में बंद हैं. इस बड़ी कार्रवाई के बाद से कॉरपोरेट गलियारों में हड़कंप मच गया है. आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है.

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