मनीष सिसोदिया को डेटा मिसमैच तो जयशंकर को 'अनमैप्ड' का अलर्ट... SIR में VIPs को क्यों आ रहे नोटिस?

दिल्ली में SIR के दौरान कई बड़े नेताओं, अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों को वोटर रिकॉर्ड में गड़बड़ी या पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं होने के चलते नोटिस मिले हैं. जानिए किसे किस वजह से नोटिस मिला और इसका मतलब क्या है.

Advertisement
SIR मामले में चुनाव आयोग ने दिल्ली में कई दिग्गजों को नोटिस भेजा है. (Photo- ITG) SIR मामले में चुनाव आयोग ने दिल्ली में कई दिग्गजों को नोटिस भेजा है. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान कई बड़े नामों को नोटिस मिलने से मामला चर्चा में है. पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई प्रमुख लोगों को उनके वोटर रिकॉर्ड में गड़बड़ी या पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं होने के चलते नोटिस जारी किए गए हैं.

Advertisement

दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और उनके परिवार को भी नोटिस मिला है. इसके अलावा CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद, पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई समेत कई वरिष्ठ और रिटायर्ड नौकरशाहों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं. अब सवाल है कि आखिर इन लोगों को नोटिस क्यों दिए गए और क्या इसका मतलब वोटर लिस्ट से नाम हटना है?

यह भी पढ़ें: आडवाणी से जयशंकर तक, चुनाव आयुक्त संधू भी लिस्ट में... दिल्ली SIR में कई दिग्गजों को नोटिस

किसे किस वजह से मिला नोटिस?

विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी को "अंतिम SIR के साथ अनमैप्ड" कैटेगरी में रखा गया है. इसका मतलब है कि उनके मौजूदा वोटर रिकॉर्ड को 2002 में तैयार पिछली SIR की वोटर लिस्ट में संबंधित रिकॉर्ड से लिंक नहीं किया जा सका. दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग इलेक्टोरल पार्ट में वोटर हैं.

Advertisement

CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद, उनकी पत्नी वनिता सूद और उनकी मां कमलेश सूद को भी इसी कैटेगरी में रखा गया है. पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी के रिकॉर्ड भी पिछली वोटर लिस्ट से लिंक नहीं हो पाए. दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में वोटर हैं.

पूर्व डिप्टी पीएम एलके आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी और बहू गीतिका आडवाणी को भी पिछली वोटर लिस्ट से रिकॉर्ड मैप नहीं होने के कारण नोटिस मिला है. खास बात यह है कि 2002 में जब पिछली SIR हुई थी, तब आडवाणी केंद्रीय गृह मंत्री थे. हालांकि उनके बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में मैपिंग प्रक्रिया में क्लियर हो गया.

सिसोदिया परिवार के रिकॉर्ड में क्या गड़बड़ी?

मनीष सिसोदिया और उनके परिवार को भी SIR के तहत नोटिस मिले हैं. सिसोदिया को जारी नोटिस में कोई खास वजह नहीं बताई गई. वहीं उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के रिकॉर्ड में "सेल्फ-नेम मिसमैच" पाया गया. उनके बेटे मीर सिसोदिया को "पैरेंट-नेम मिसमैच" के चलते नोटिस मिला. यह उनके माता के वोटर रिकॉर्ड में मिली गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है.

परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्हें इन नोटिसों के जारी होने की जानकारी नहीं थी. CPM सांसद जॉन ब्रिटास की पत्नी शेबा ब्रिटास और उनके बेटे आनंद ब्रिटास को भी नोटिस मिला है. शेबा के रिकॉर्ड में सेल्फ-नेम मिसमैच और आनंद के रिकॉर्ड में पैरेंट-नेम मिसमैच पाया गया है. दोनों नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में वोटर हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: दिल्ली में कई VIPs को SIR का नोटिस, देखें किस-किस का नाम है शामिल

IAS और दूसरे बड़े अधिकारियों को भी नोटिस

SIR की जांच में कई मौजूदा और रिटायर्ड IAS अधिकारियों के रिकॉर्ड भी सामने आए हैं. विदेश सचिव विक्रम मिसरी, SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके रिकॉर्ड पिछली वोटर लिस्ट से मैप नहीं हो पाए. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना देसाई, उनके पति प्रकाश देसाई, बेटे और वकील माइक देसाई और बहू साक्षी देसाई को भी "अंतिम SIR के साथ अनमैप्ड" कैटेगरी में रखा गया है.

क्या नोटिस का मतलब नाम कट जाएगा?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ किया है कि सिर्फ नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि वोटर का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा. CEO के मुताबिक, ये सिस्टम जनरेटेड नोटिस हैं, जिनका मकसद ECINET में डेटा को सही करना है. किसी भी वोटर का नाम बिना सुनवाई का मौका दिए और उचित, स्पष्ट और अपील योग्य आदेश के बिना हटाया नहीं जा सकता.

जिन वोटरों के रिकॉर्ड पुराने रिकॉर्ड से लिंक नहीं हो पाए हैं या जिनकी डिटेल में गड़बड़ी मिली है, उन्हें संबंधित इलेक्टोरल रेजिस्ट्रेशन ऑफिसर के सामने जवाब और जरूरी दस्तावेज देने होंगे. इसके बाद अधिकारी जवाब और दस्तावेजों की जांच कर आदेश जारी करेंगे. इन नोटिसों पर कार्रवाई 29 अक्टूबर तक पूरी की जानी है. इसके बाद दिल्ली की फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement